चुनाव बाद हत्या के मामले में हाई कोर्ट से जमानत नहीं

बीरभूम के नलहाटी में बांस से पीट-पीट कर की थी हत्या
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : चुनाव बाद हत्या के एक मामले में हाई कोर्ट के जस्टिस राजाशेखर मंथा और जस्टिस केशांग दोमा भूटिया के डिविजन बेंच ने अभियुक्त की जमानत याचिका खारिज कर दी। सीबीआई की तरफ से जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि अगर जमानत दी जाती है तो जांच की प्रक्रिया पटरी से उतर जाएगी।
एडवोकेट फिरोज इदुलजी ने बताया कि मैनुद्दीन शेख ने जमानत याचिका दायर की थी। उसके खिलाफ आरोप है कि बीरभूम के नलहाटी में उसने राजनीतिक मतभेद के कारण बांस से पीट-पीट कर मनोज जायसवाल की हत्या कर दी थी। जायसवाल अपने एक कर्मचारी के घर ईद की दावत में आए थे और वहां से अगवा करने के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। पहले यह मामला पुलिस के पास था पर बाद यह जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। बचाव पक्ष की तरफ से कुछ तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए कहा गया कि मृतक की पत्नी ने अपने बयान में किसी तरह के राजनीतिक विवाद से इनकार किया है। एडिशनल सालिसिटर जनरल वाई जे दस्तूर ने बहस करते हुए कहा कि मृतक की पत्नी ने क्षेत्र से बाहर जाने के बाद अपने बयान में कहा है कि मनोज जायसवाल भाजपा के समर्थक थे। उन्होंने कई व्हाट्सऐप मेसेज का हवाला भी दिया। एडिशनल सालिसिटर जनरल ने कहा कि अभियुक्त का इस क्षेत्र में भयानक आतंक है और इस मामले के अन्य चश्मदीद गवाह टूट सकते हैं। डिविजन बेंच ने बचाव पक्ष की दलील का हवाला देते हुए कहा कि हो सकता है यह चुनाव बाद हिंसा का मामला नहीं हो पर अपराध तो हुआ है। इस मौके पर जमानत दी जाने से जांच प्रभावित हो सकती है, लिहाजा जमानत याचिका खारिज की जाती है।

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