नदिया से कोलकाता होकर नाइजेरियन गैंग को सप्लाई हो है प्रीएक्ट‌वेटेड सिम कार्ड

प्रीएक्ट‌िवेटेड सिम कार्ड बेचने के मामले में और दो गिरफ्तार
राज्य के विभिन्न जिलों से सिम कार्ड सप्लाई होता था जामताड़ा गैंग को
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर में सक्रिय प्रीएक्ट‌िवेटेड सिम कार्ड बेचने वाले गिरोह के और दो सदस्यों को कालकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया है। अभियुक्तों के नाम आलोक दास (28) और रंजीत चक्रवर्ती (28) हैं। कोलकाता पुलिस के एंटी बैंक फ्रॉड सेक्शन के अधिकारियों ने दोनों को सोनरापुर इलाके से गिरफ्तार किया है। ज्वाइंट सीपी क्राइम मुरलीधर शर्मा ने बताया कि मामले में अभी तक 2 हजार प्रीएक्ट‌िवेटेड सिम कार्ड जब्त किय गया। इस मामले में नदिया और मुर्शिदाबाद के कुछ दुकानदार शामिल है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इस गिरोह के सदस्य प्रीएक्ट‌िवेटेड सिम कार्ड को एक साथ दो ठगों को बेचा करते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार जामताड़ा गिरोह के सदस्यों ने राज्य के विभिन्न जिलों मं अपना एजेंट बना रखा है। खासतौर पर मुर्शिदाबाद, नदिया , सोनारपुर और उत्तर 24 परगना के विभिन्न इलाकों में इनके एझेंट मौजूद हैं। यह लोग वहां के स्थानीय दुतानदार से सिम कार्ड खरीदेन वाले एक ग्राहक के नाम पर दुकानदारी की मदद से 5 सिम कार्ड उठाते हैं। इस तरह एक जिले से 200 से 300 सिम कार्ड हर महीने आकर सभी एजेंट कोलकाता एकत्रित होते हैं। यहां पर इनका सरगना जामताड़ा गिरोह के सदस्यों को एक साथ 1500 से 2 हजार सिम कार्ड सप्लाई किया करता था।
नाइजेरियन ठगों को बेचते हैं वर्चुअल सिम
पुलिस के अनुसार प्रीएक्टिवेटेड सिम कार्ड बेचवे वाले गिरोह के सदस्यों से पूछताछ के दौरान पता चला कि यह लोग सिम कार्ड का ओटीपी टेलीग्राम के जरिए नाइजेरियन ठगों को बेचा करता हैं। इसके लिए उन्हें मोटी रकम मिलती है। नाइजेरियन ठग इन सिम कार्ड के ओटीपी के जरिए वाट्स ऐप खोलते हैं और फिर वाट्स मैसेज के जरिए विभिन्न लोगों को मैसेज भेजकर ठगी करते हैं। जिस समि कार्ड के ओटीपी से नाइजेरियन वाट्स खोलते हैं फिर उसी सिम कार्ड को ठग जामताड़ा गिरोह के सदस्यों को बेच दिया करते हैं। इसके बाद उक्त सिम कार्ड के जरिए एक समय पर दो तरह की ठगी होती है। पहले वाइजेरियनगैंग वा्टस केजरिए लोगों को चूनाते हैं तो दूसरी तरफ जामताड़ा गिरोह के सदस्य फोन कॉल के जरिए लोगों को ठगी का शिकार करते हैं। ऐसे में पुलिस जब इन ठगी के मामले की जांच करती हैं तो पाया जाता है कि वाट्स ऐप से होने वाली ठगी का आईपी एड्रेस नाइजेरिया और जामताड़ा गिरोह द्वारा की गयी ठगीयहां की है। यही नहीं दोनों सिम कार्ड एक ही है। फिलहाल पुलिस इस तरह की ठगी पर लगाम कसने के लिए प्रीएक्ट‌िवेटेड सिम कार्ड बेचने वाले और सप्लाई करने वाले गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर रही है।

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