नयी शिक्षा नीति में रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध

कोलकाता : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मसौदा तैयार करने वाली समिति के प्रमुख रहे डाॅ. के. कस्तुरीरंगन ने कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) में 21वीं सदी की आवश्यकता और शिक्षा की गुणवत्ता से समझौते के बगैर रोजगार का कौशल प्रदान करने वाली शिक्षा देने की कोशिश की गयी है। एक ओर स्नातक स्तर पर बहुउद्देश्यीय शिक्षा का विचार तो दूसरी ओर माध्यमिक स्तर की शिक्षा में चार वर्ष की संरचना कई प्रकार के कौशल चुनने का अवसर प्रदान करते हैं। इनका इस्तेमाल रोजगार के अवसर के तौर पर भी किया जा सकता है।

बंगाल चेंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री के तीसरे एनुअल एडुकेशन कन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 15 साल की उम्र में छात्र तय कर पायेंगे कि उन्हें वोकेशनल कोर्स करना है या पेशेवर कोर्स में आगे बढ़ना है। इसरो के पूर्व चेयरमैन व पद्म विभूषण डॉ. कस्तूरीरंगन ने कहा कि नयी शिक्षा नीति से आने वाली पीढ़ी को न सिर्फ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि रोजगार भी हासिल होगा। इसमें स्कूल की आरंभिक कक्षाओं से ही व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया गया है।

शिक्षा का अंतिम उद्देश्य रोजगार हासिल करना होता है लेकिन सिर्फ सर्टिफिकेट या डिग्रियों से रोजगार प्राप्त नहीं हो जाता है। इस कार्यक्रम को चेंबर के अध्यक्ष बी बी चटर्जी, जेआईएस इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज एंड रिसर्च, कोलकाता के निदेशक अजय कुमार राय, डा. सुवर्णो बोस, चेंबर के भावी चेयरमैन देव ए. मुखर्जी ने संबोधित किया।

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