नारदा : हाई प्रोफाइल नेताओं की जमानत पर सुनवायी सोमवार से

हाई कोर्ट ही क्यों, किसी भी अदालत में ट्रांसफर कर सकते हैं : जस्टिस बिंदल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में चार हाई प्रोफाइल नेताओं की जमानत पर सोमवार से सुनवायी शुरू होगी। यहां गौरतलब है कि इस मामले में मंत्री सुब्रत मुखर्जी एवंं फिरहाद हकीम और पूर्व मंत्री एवं विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी को अंतरिम जमानत मिली है। एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल ने सालिसिटर जनरल और बचाव पक्ष से कहा कि पहले वे जमानत के मामले में अपनी दलील पेश करें। एकिटंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस आईपी मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन, जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की लार्जर बेंच इस मामले की सुनवायी कर रही है।
इस मामले की सुनवायी के बारे में जानकारी देते हुए एडवोकेट अमृता पांडे ने बताया कि जस्टिस बिंदल ने कहा कि हाई कोर्ट ही क्यों हम इस मामले को किसी भी कोर्ट में ट्रांसफर कर सकते हैं। यहां गौरतलब है कि सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 407 के तहत इस मामले के ट्रांसफर के लिए अपील दायर की है। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील वृहस्पतिवार को पूरी हो गई। उनकी कई दिनों की बहस का लब्बोलुवाब यही है कि बाधा डाले जाने के कारण इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया विषाक्त हो गई थी। इसके साथ ही आम लोगों की धारणा बनी थी कि भीड़तंत्र के कारण न्याय नहीं मिल पाया। इसका जवाब देते हुए एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर उनकी दलील को मान ले तो सही मायने में किसी रुकावट की कोई जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बस एक धारणा बननी चाहिए कि रुकावट डाली गई है। अगर कोलकाता की सड़कों पर कोई प्रदर्शन हो रहा है तो उसे भी रुकावट मान ली जाएगी। इसके मुताबिक न्यायिक प्रक्रिया में सही मायने में रुकावट डाली गई यह‌ दिखाने क आवश्यकता नहीं है। बहस के अंतिम दिन सालिसिटर जनरल को बेंच के कई दिलचस्पा सवालों का जवाब देना पड़ा। जस्टिस मुखर्जी ने उनसे जानना चाहा कि सीबीआई को हाई कोर्ट आने के लिए इतनी असाधारण राह क्यों अख्तियार करनी पड़ी। ऐसी भी क्या जल्दी थी, सीबीआई तो सामान्य तरीके से दो दिन बाद भी हाई कोर्ट में अपील दायर कर सकती थी। अगर इस सामान्य राह पर चलते तो जांच एजेंसी का हित किस तरह प्रभावित हो जाता। इसके साथ ही कहा कि आप का 17 मई का ई-मेल क्या है, रिट है, अपील है या पीआईएल है। सोमवार से जमानत पर सुनवायी होगी इसलिए यह टिप्पणी बेहद मौजू है। जस्टिस टंडन सवाल करते हैं कि मान लिया न्याय ढंग से नहीं हो पाया तो क्या इसी आधार पर उनकी जमानत याचिका खारिज की जा सकती है। जस्टिस सौमेन सेन सवाल करते हैं क्या हम ऐसे में जमानत दे सकते हैं। सालिसिटर जनरल मामले को मोड़ने की कोशिश करते हैं तो जस्टिस बिंदल कहते हैं जमानत दी जा सकती है या नहीं इस मुद्दे पर अपनी दलील दें। बहरहाल सोमवार से इसी सवाल पर बहस होगी।

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