नारदा मामले को स्पेशल कोर्ट से हाई कोर्ट में लाया जाए

सीआरपीसी की धारा 407 के सलिसिटर जनरल की पुरजोर दलील
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले की सुनवायी सीबीआई के स्पेशल कोर्ट से हाई कोर्ट में लाया जाए। सीबीआई की तरफ से सीआरपीसी की धारा 407 का हवाला देते हुए यह रिट दायर की गई है। बुधवार को सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सीबीआई की तरफ से लार्जर बेंच के समक्ष पैरवी करते हुए अपनी दलील में इस बात पर विशेष जोर दिया। हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस आईपी मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन, जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की लार्जर बेंच इस मामले की सुनवायी कर रही है।
एडवोकेट अमृता पांडे ने इस मामले की सुनवायी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सलिसिटर जनरल ने ओल्गा टेलिस के मामले में जजमेंट का हवाला देते हुए कहा कि न्याय मिलना ही नहीं न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्पेशल कोर्ट के फैसले से लोगों में यही धारणा बनी है कि दबाव में आ कर फैसला सुनाया गया है और इस तरह न्याय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 17 मई को जो कुछ भी हुआ उससे इस मामले में उस दिन की पूरी न्यायिक प्रक्रिया ही कलुषित हो गई है। उन्होंने कहा कि अन्याय‌ दिखने का अर्थ भी न्याय नहीं मिलना है। इस बाबत जस्टिस मुखजी ने सवाल किया कि क्या आप पांच जजों के बेंच के समक्ष इसे साबित कर पाएंगे। क्या इस बेंच के समक्ष इस मामले का ट्रायल होगा। यह भी पूछा कि वे कौन हैं जिनकी वजह से यह धारणा बनी है। सालिसिटर जनरल ने कहा कि मुख्यमंत्री धरना पर बैठी है, पथराव हो रहा है, हजारों लोग जमे हैं और वहां अगर फैसला आता है तो लोगों की ऐसा ही बोध होगा। इस पर बेंच ने एक हाइपोथिटकल सवाल पूछा- मान लीजिए एक जमानत का मामला है और बाहर हजारों लोगों की भीड़ जमानत देने की मांग कर रही है और मेरिट के आधार पर जमानत दी जाती है तो क्या इसे भीड़ का दबाव कहेंगे। इसके जवाब में सालिसिटर जनरल कहते हैं यहां न्यायिक व्यवस्था को काम नहीं करने दिया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट का हवाला इसे साबित करने के लिए दे रहा हूं। किस तरह की गुंडागर्दी हो रही है इसे बताने के लिए दे रहा हूं। जस्टिस सौमेन सेन सवाल करते हैं कि क्या मीडिया ट्रायल हो रहा है। अगर मीडिया किसी को दोषी करार दे तो क्या इसी आधार पर एक अवधारणा बन जाएगी। सालिसिटर जनरल की न्याय नहीं हो पाने की दलील पर जस्टिस सेन कहते हैं कि आपने जितने भी फैसलों का उल्लेख किया है सभी ट्रायल के स्टेज के हैं जहां गवाहों को बयान देना पड़ता है। यहां तो कयास लगाया गया है कि निष्पक्षता प्रभावित हुई है। क्या आपके पास ऐसा कोई फैसला है जहां जमानत के समय की ऐसी स्थिति का उल्लेख हो।

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