नंदीग्राम का संग्राम : अधिकारी परिवार बनाम ममता

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : इस बार चुनाव तो पूरे पश्चिम बंगाल में है, लेकिन एक ओर शुभेंदु अधिकारी तो दूसरी ओर ममता बनर्जी के खड़े होने से नंदीग्राम की सीट ‘हॉट स्पॉट’ बन गयी है। नंदीग्राम का संग्राम अब अधिकारी परिवार बनाम ममता बनर्जी की लड़ाई बन चुका है। एक तरफ इसे अधिकारी परिवार के अधिकार की लड़ाई माना जा रहा है ताे दूसरी ओर, ममता बनर्जी के लिए यह अहम् की लड़ाई बन चुका है। दोनों ओर से ही दावे किये जा रहे हैं, लेकिन नंदीग्राम की जनता किसे चुनेगी, यह 2 मई को ही पता चल सकेगा।
नंदीग्राम की हिंसा कभी नहीं भुलायी जा सकती
वर्ष 2007 में तत्कालीन वाममोर्चा सरकार ने स्पेशल इकॉनॉमिक जोन के तहत नंदीग्राम में केमिकल हब बनाने की अनुमति दी थी जिसे लेकर ही हिंसा की शुरुआत हुई थी। स्थानीय ग्रामीणों ने इस केमिकल हब का विरोध किया था। पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हुई संघर्ष की घटना में 14 ग्रामीणों की मौत हो गयी थी जिसके बाद पुलिसिया अत्याचार के विरोध में तेज आंदोलन हुआ था।
ये कहा शिशिर अधिकारी ने
शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी जो कि तृणमूल सांसद हैं, उन्होंने कहा था, ‘ममता को यहां से नहीं लड़ना चाहिये। वह मेरे बेटे के सामने कुछ ऐसे अंतर से हारेंगी जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी।’
अधिकारी परिवार का गढ़ है नंदीग्राम
नंदीग्राम समेत पूर्व मिदनापुर में अब भी अधिकारी परिवार का प्रभाव सबसे अधिक है। शुभेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी 1982 में कांथी दक्षिण से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, लेकिन बाद में वह तृणमूल के संस्थापक सदस्य बन गये। शिशिर अधिकारी वर्ष 2009 से अब तक कांथी से 3 बार के सांसद हैं। वर्ष 2006 में शुभेंदु ने कांथी दक्षिण सीट से जीत हासिल की थी। 3 वर्ष बाद वह तमलुक संसदीय सीट से चुने गये। कोंटाई से शिशिर अधिकारी तो तमलुक से उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी सांसद हैं। दिव्येंदु के भाई सौमेंदु अधिकारी कोंटाई नगरपालिका के चेयरमैन रह चुके हैं। इन पोर्टफोलियो के अलावा अधिकारी कई कमेटियों और वर्कर्स यूनियनों में भी रह चुके हैं, लेकिन शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में जाने के बाद से तृणमूल नेतृत्व ने शिशिर अधिकारी को भी पदों से हटा दिया। ग्रामीण बंगाल के 4-5 जिलों जैसे कि पूर्व मिदनापुर, पश्चिम मिदनापुर, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर और मालदह के भी कई हिस्सों में शुभेंदु अधिकारी का प्रभाव है।
नंदीग्राम आंदोलन में थी शुभेंदु की बड़ी भूमिका
वर्ष 2007 में शुभेंदु अधिकारी ने भूमि अधिग्रहण के विरोध में केमिकल कंपनी के खिलाफ नंदीग्राम में आंदोलन में अहम भूमिका निभायी थी। भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी के बैनर तले यह आंदोलन किया गया था जिसमें पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच हिंसक घटना में कई लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद आंदोलन और तेज हुआ जिस कारण तत्कालीन वाममोर्चा सरकार काफी दबाव में आ गयी थी। इसी तरह सिंगुर में भी भूमि अधिग्रहण आंदोलन हुआ था। नंदीग्राम के आंदोलन में शुभेंदु ने बड़ी भूमिका निभायी थी जिसके बाद तृणमूल ने माकपा को सत्ता से बेदखल कर दिया था।
कभी ममता बनर्जी के साथ मिलकर लड़ने वाले शुभेंदु अधिकारी इस बार ममता बन​र्जी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। अब देखना यह है कि नंदीग्राम की जनता बंगाल के भविष्य के तौर पर किसे चुनती है।

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