नंदीग्राम की मां ने ठोका ताल, कहा : मैं हराऊंगी शुभेन्दु को

1 दशक से शुभेन्दु के साथ फिरोजा बीबी का था मां-बेटे का रिश्ता
राजनीतिक मंच पर आर-पार की शुरू हुई लड़ाई

सोनू ओझा

कोलकाता : मां के लिए बेटा कलेजे का टुकड़ा होता है। हर हाल में बेटा मां का दुलारा है मगर वही बेटा अगर मां की उम्मीदें तोड़कर आगे बढ़ जाए तो मां को भी पत्थरदिल बनने में तनिक समय नहीं लगता है। बंगाल की राजनीति में भी मां-बेटे के रिश्ते में ऐसी ही दरार देखने को मिल रही है। यहां हम सगे मां-बेटे की बात नहीं कर रहे बल्कि सगे से भी बढ़कर रिश्ते को तवज्जो देने वाली नंदीग्राम की मां यानी फिरोजा बीबी और शुभेन्दु अधिकारी की बात कर रहे हैं जिनके बीच पिछले एक दशक से मां-बेटे जैसा रिश्ता रहा है। शुभेन्दु ने अपनी राह बदल दी है जबकि फिरोजा बीबी आज भी वहीं खड़ी हैं जहां शुभेन्दु उन्हें छोड़कर गये थे। मन में गुस्सा है, साथ ही अपनी पार्टी को मजबूत करने की जिद्द है शायद इसीलिए नंदीग्राम की इस मां ने ताल ठोक कर बेटे शुभेन्दु को चैलेंज दिया है कि चुनाव में अब वह उसे मात देंगी।
राजनीति ने तोड़ा 10 साल से अधिक का रिश्ता
नंदीग्राम से शुभेन्दु खड़े हों या ना हों फिरोजा हो सकती हैं तृणमूल उम्मीदवार।
नंदीग्राम में भाजपा को शिकस्त देने के लिए तृणमूल फिरोजा बीबी को इस सीट से चुनाव में बतौर प्रार्थी खड़ा करने के मूड में है। इस बारे में फिरोजा बीबी ने कहा ​कि यह पूरी तरह पार्टी का फैसला है। मुझे जो निर्देश दिया जाएगा वह मैं करूंगी। हालांकि शुभेन्दु अधिकारी ने अब तक खुलकर अपने चुनावी दांवपेंच पर कुछ नहीं कहा है। उन्होंने यह तक नहीं कहा है कि वह चुनाव में खड़े होंगे या कहां से खड़े होंगे।
क्या कहा फिरोजा बीबी ने
इस बारे में फिरोजा बीबी ने कहा कि कुपुत्र होने से बेहतर है कोई पुत्र न हो। आज मैंने एक बेटा खो दिया तो क्या हुआ उसके बदले हजारों की संख्या में बेटे मेरे साथ खड़े हैं। उस एक बेटे के खिलाफ अगर मुझे लड़ना भी पड़े तो मैं डंट कर उसका मुकाबला करूंगी। वक्त यह देखने का नहीं है कि कौन किसका बेटा है और मां कौन है। मेरी प्राथमिकता दीदी हैं जिनका हर निर्देश पालन करना मेरा कर्तव्य है।
कौन है फिरोजा बीबी
2007 में घटे नंदीग्राम कांड में जिन 14 लोगों की मौत हुई थी उसमें फिरोजा बीबी का बेटा शेख इमदादुल भी था। 2009 में नंदीग्राम विधानसभा के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने फिरोजा बीबी को टिकट दिया था। उस वक्त शुभेन्दु ने इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए जी-तोड़ मेहनत की थी और तभी से शुभेन्दु फिरोजा के लिए उनके बेटे के समान माने जाने लगे। उपचुनाव में फिरोजा बीबी 39,459 वोटों से जीती थी। उसके बाद 2011 में भी फिरोजा बीबी को यहां जीत मिली थी। उसके बाद इसी सीट से शुभेन्दु को तृणमूल ने जिताया था जिसमें फिरोजा बीबी ने तनिक भी आपत्ति नहीं की थी और उनका क्षेत्र बदल दिया गया था।

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