मेरी लड़ाई किसी से नहीं, काम मेरी पहचान – फिरहाद हकीम

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पोर्ट विधानसभा चुनाव में मैं किसी को अपना प्रतिद्वंदी नहीं मानता हूँ। मेरी लड़ाई किसी से नहीं बल्कि मेरी खुद से है। काम ही मेरी पहचान है। यह कहना है पोर्ट विधानसभा के तृणमूल उम्मीदवार फिरहाद हकीम का। उन्होंने कहा कि अगर जनता मुझे नहीं जिताती तो ममता बनर्जी चाह कर भी मुझे मंत्री या मेयर नहीं बना पातीं। जनता जनार्द्धन हैं। जनता के सामने हम सेवक हैं। पोर्ट क्षेत्र के 80 प्रतिशत लोगों के दिलों में मैं हूँ, बाकी 20 प्रतिशत के दिलों में भी घर बनना चाहता हूँ। इस बात का डर है कि मैं उन 20 प्रतिशत लोगों के दिलों में बस पाया हूँ या नहीं। मुझे चिंता जीतने हारने का नहीं है। जितने लोगों का दिल जीत चुके थे उतने के दिलों में है, और कुछ जोड़ पाये हैं, या किसी ने दिल से निकाल दिया है। इस बात की चिंता हैं। कहां हम मेरा काम बाकी है यहीं हम खोजते रहते हैं। इसलिए मेरा विरोधी कोई नहीं मैं खुद हूं।
मेरा काम देखकर जनता चुनेगी
फिरहाद ने कहा कि जनता मुझे मेरे काम को देखकर फिर चुनेगी। पोर्ट में दस सालों पहले क्या स्थिति थी। अभी क्या है। सरक बिजली पानी बाथरूम क्या नहीं यहाँ किया गया है। मैं जात धर्म पर नहीं काम के बल पर जनता का आशीर्वाद मानता हूँ।
किसी की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी
एक समय में यहाँ क्या स्थिति थी, अभी शांति राज क़ायम हुआ है। पोर्ट में कोई दहशत नहीं चलेगा। यहां लोग शांति से सिर उठाकर जीयेगा। हिम्मत के साथ जियेगा। किसी को भी गुंडागर्मी नहीं करने देंगे। गुंदा का जगह जेल में है। इससे पहले भी कई मेरे ख़िलाफ़ खरे हुए। एक कांग्रस से बाद में भाजपा में चले गए। वहां जाकर पैसे का नहीं कुछ और चीज का लेनदेन करने लगे।

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