मुकुल को बीमार सजा रखा है तृणमूल ने : शुभेंदु

दिलीप घोष ने भरोसे में भूल की स्वीकार
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दलबदल विरोधी कानून लागू होने की आशंका में ही मुकुल राय को तृणमूल बीमार बनाकर रखना चाहती है। कुछ ऐसा ही दावा विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने किया। कृष्णानगर उत्तर के विधायक मुकुल राय के बाद विष्णुपुर व बागदा के विधायक तन्मय घोष और विश्वजीत दास तृणमूल में शामिल हुए। इसे लेकर राज्य के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘जो विधायक होने के बाद दलबदल कर रहे हैं, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा, कानूनी कदम उठाये ​जाएंगे। एक और चुनाव तक मामला चलता रहेगा, अब ऐसा नहीं होने वाला है।’ इसके साथ ही शुभेंदु ने कहा, ‘मुकुल राय को बीमार सजाकर रखा गया है। पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के चेयरमैन पद को लेकर इतना विवाद हो रहा है, इसके बावजूद मुकुल बाबू कमेटी की बैठक में नहीं आ रहे हैं। कमेटी के सदस्य तृणमूल विधायक तापस राय काम चला रहे हैं।’ प्रदेश भाजपा की बैठक में तय किया गया है दल​बदल विरोधी कानून विधानसभा में लागू करने की जिम्मेदारी शुभेंदु संभालेंगे। इस पर शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘दलबदल विरोधी कानून बंगाल में गत 10 वर्षों से लागू नहीं हुआ। मुकुल राय की घटना में हमने जो कदम उठाया है, उसमें हम सफल होंगे। कानूनी लड़ाई में हम किस रास्ते पर आगे बढ़ेंगे, उसकी जिम्मेदारी पार्टी ने मुझे दी है। पदत्याग किये बगैर दलत्याग नहीं चलेगा। तन्मय और विश्वजीत के खिलाफ भी भाजपा अदालत जाएगी।’ तन्मय और विश्वजीत के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि दलबदल विरोधी कानून काे ठेंगा दिखाया गया और दोनों ही विधायक पिछले 4 महीने से भाजपा से संपर्क में नहीं थे।
विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक 3 विधायकों के तृणूमल में चले जाने से भाजपा परेशान है, ये बुधवार को काफी हद तक स्पष्ट हो गया। बुधवार को दक्षिण बंगाल के सभी विधायकों को पार्टी मुख्यालय में बुलाया गया था। उनके साथ दिलीप घोष व शुभेंदु अधिकारी ने बात की। इसी तरह उत्तर बंगाल के विधायकों को लेकर भी सिलीगुड़ी में प्रदेश भाजपा के सांगठनिक महासचिव अमिताभ चक्रवर्ती ने बैठक की। क्या भाजपा डर रही है पूछे जाने पर दिलीप ने कहा, ‘मुख्यतः नये विधायकों के प्रशिक्षण के लिए ही बैठा गया है। हालांकि ये भी ठीक है कि दबाव में कुछ लोग आत्मसमर्पण कर रहे हैं।’ वहीं मुकुल पर निशाना साधते हुए दिलीप घोष ने कहा, ‘मुकुल राय के समान नेता को पहली बार चुनाव में जीतने का मौका हमने दिया, लेकिन बाद में उन्होंने जो किया, उससे राजनीति के प्रति श्रद्धा समाप्त होती जा रही है। हमने विश्वास कर गलती की थी।’

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