मां की चाहत : बेटे को नहीं मिले हाई कोर्ट से जमानत

पति के कातिल को हर हाल में सजा दिलाने पर आमादा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एक मां की चाहत है कि उसके बेटे को किसी भी हाल में हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिले। रोजमर्रा के जीवन में यह एक अंतर्विरोध सा लगता है, क्योंकि आम तौर पर मां अपने बेटे को, चाहे वह कितना ही बड़ा गुनहगार क्यों न हो, बचाने की कोशिश करती है। पर यहां तो उसका बेटा ही उसके पति का कातिल है। लिहाजा वह पत्नी धर्म निभाने पर आमादा है।
एडवोकेट पुर्णिमा घोष यह जानकारी देते हुए बताती हैं बेलू पासवान ने हाई कोर्ट के जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस बिभाष पटनायक के डिविजन बेंच में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। उसकी मां निर्जला पासवान डिविजन बेंच के फैसले में दखल तो नहीं दे सकती थी पर उसकी अदम्य चाहत यही थी कि डिविजन बेंच बेटे की जमानत याचिका खारिज कर दे। उसी ने बेलू के‌ खिलाफ 2016 में 25 अगस्त को मालदह जिले के रतुआ थाने में एफआईआर दर्ज करायी थी। बेलू ने उस दिन रात को साढे बारह बजे के करीब अपने पिता कृष्णदेव पासवान को धारदार हथियारों से हमला कर के बुरी तरह घायल कर दिया था। इसके बाद एनआरएस मेडिकल कालेज अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद बेलू फरार हो गया था। बेलू के एडवोकेट ने उसके पक्ष में पुरजोर दलील दी। मसलन जब पिता एनआरएस में भर्ती थे उस समय बेलू उनके साथ ही था। पोस्टमार्टम के समय भी वह अपने पिता की लाश के साथ था। एडवोकेट पुर्णिमा घोष की दलील थी कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। सीआरपीसी की धारा 161 के तहत उसके गांव बानिकतला के पड़ोसियों ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने इस घटना के बाद खून से सने कपड़ों में बेलू को भागते हुए देखा था। अलबत्ता बचाव पक्ष की दलील थी कि यह बयान घटना के तीन साल बाद लिया गया था। जस्टिस अरिजीत बनर्जी के डिविजन बेंच ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए अग्रिम जमानत याचिका रद्द कर दी। इस तरह मां की चाहत पूरी हो गई। मामले के इश्तगासे के मुताबिक बेलू के पिता की उम्र 50 साल से अधिक थी और शारीरिक अस्वस्था के कारण कोई काम नहीं कर पाते थे। बेलू उन पर पैसों के लिए दबाव बनाता रहता था और जान से मारने की धमकी भी देता रहता था। उस रात उसने धमकी को हकीकत में बदल दिया। यहां गौरतलब है कि निर्जला देवी का बेलू इकलौता पुत्र है और चार बेटियां है। पर इकलौता पुत्र प्रेम पर पति का धर्म निभाने का जज्बा ज्यादा भारी पड़ा है।

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