मिशन बंगाल : तृणमूल-भाजपा दोनों के लिए बड़ा दांव हैं नेताजी सुभाषचंद्र बोस

महापुरुषों की विरासत पर बिछी है बंगाल की चुनावी सियासत
नेताजी की 125वीं जयंती पर आमने-सामने आयीं दोनों मजबूत पार्टियां

सोनू ओझा
कोलकाता : बंगाल में चुनावी सियासत की बात करें तो यहां महापुरुषों को लेकर हमेशा से ही चुनावी जंग छेड़ी गयी है। कवि गुरु रवींद्रनाथ टैगोर हों, स्वामी विवेकानंद हों या अरविंद घोष, इन युगपुरुषों का योगदान चुनावी मुद्दे के तौर पर राजनीतिक पार्टियां हमेशा से ही लेती रही हैं। इस बार भी इन्हीं महापुरुषों की विरासत पर बंगाल की चुनावी सियासत बिछायी गयी है। इस नजरिये से देखें तो यह साल साधारण साल नहीं है बल्कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती के तौर पर मनाये जाने वाला एक खास साल है 2021। अहम बात यह है कि नेताजी बंगाल से जुड़े हैं और इस साल बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस चुनाव में तृणमूल और भाजपा दोनों ही नेताजी की 125वीं जयंती को अपने दांव के तौर पर इस्तेमाल कर रही हैं।
पैदल यात्रा कर ममता मनाएंगी देशनायक दिवस
मौका सिर्फ जयंती का नहीं बल्कि चुनावी भी है, इसे देखते हुए ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस खास मौके का पूरा फायदे उठाते हुए नेताजी की जयंती पर शंखनाद के साथ पैदल यात्रा निकालेंगी। इस दिन को ममता ने देशनायक दिवस का नाम दिया है। साथ ही केंद्र पर दबाव बनाया है कि 23 जनवरी को राष्ट्रीय छुट्टी घोषित करे। दूसरी तरफ ममता ने नीति आयोग के तर्ज पर ही राज्य स्तर पर प्लानिंग कमीशन तैयार करने की घोषणा की है। ममता ने नेताजी को लेकर अच्छी-खासी योजनाओं पर काम करने की भी घोषणा की है, जिनमें नेताजी के नाम पर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण करना है। एनसीसी के तर्ज पर शिक्षण संस्थानों में जयहिन्द वाहिनी तैयार की जाएगी। राजारहाट में आजाद हिन्द फौज मोन्यूमेंट तैयार करना है। नेताजी पर डॉक्युमेंटरी तैयार करनी है।
बंगाल आकर पराक्रम दिवस मनाएंगे मोदी
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर भाजपा भी कतई मौका नहीं छोड़ना चाहती है। मंगलवार को ही केंद्र की ओर से घोषणा कर दी गयी कि 23 जनवरी यानी नेताजी जयंती को देश पराक्रम दिवस के रूप में मनाएगा। इस दिन खुद पीएम मोदी कोलकाता आकर देश भर में पराक्रम दिवस मनाने के लिए देशवासियों को संबोधित करेंगे।
राज्य और केंद्र दोनों ने ही गठित की कमेटी
ममता बनर्जी ने नेताजी को केंद्र कर कमेटी का गठन किया जिसमें वह खुद चेयरपर्सन हैं जबकि हर क्षेत्र से जुड़े व्यतित्व को इस कमेटी में रखा गया है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से भी उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है जिसमें बंगाल की ओर से ममता बनर्जी के अलावा राज्यपाल जगदीप धनखड़, अधीर रंजन चौधरी, शुभेन्दु अधिकारी समेत बाकी को भी समिति में जगह दी गयी है। बहरहाल नेताजी की जयंती को लेकर दोनों ही राजनीतिक पार्टियां जुटी हुई हैं, अब देखने वाली बात होगी कि इनके इस मुद्दे से जनता का रुख किसकी ओर झुकता है।

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