वोट देने के लिए आने में प्रवासी मजदूरों की दिलचस्पी नहीं

चुनाव के मौके पर भूल जाने के करते है मजदूरों से वादे
सात वर्षों से बंद पड़ा है डुआर्स का मधु चाय बागान
अजय साह
अलीपुरदुआर : चुनाव आता है और चला जाता है। उम्मीदवार जीत कर विधायक बनते हैं और मजदूर इस दौरान किए गए झूठे वादों का बोझ पूरे पांच साल ढोते रहते हैं। यही सिलसिला फिर दूसरे चुनाव में दोहराया जाता है। वादों का बोझ ढोते-ढोते तंग आ गए मजदूरों की अब वोट देने में कोई दिलचस्पी नहीं रह गई है। यहां से दूसरे राज्यों में काम करने गए मजदूर अब वोट देने के लिए आने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
अलीपुरदुआर जिले का बंद मधु चाय बागान इसका गवाह है। नेताओं और मंत्रियों के आश्वासन के बावजूद भी श्रमिकों का ख्वाब अभी भी अधूरा है क्योंकि यह चायबागान बंद पड़ा है। चुनाव के इस मौके पर मजदूर अपनी नाराजगी का इजहार करने लगे हैं। डुआर्स के अलीपुरदुआर जिले का मधु चाय बागान 2014 से ही बंद पड़ा है। लिहाजा मजदूरों की अवस्था अत्यंत दयनीय हो गई है। इस चाय बागान के सैकड़ों मजदूर केरल और दिल्ली जैसे अन्य राज्यों में काम करने चले गए हैं। अलीपुरदुआर में दस अप्रैल को चुनाव होगा। मधु चाय बागान से अन्य राज्यों में गए प्रवासी मजदूर चुनावों में हिस्सा लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिका रहे हैं। उनका कहना है कि कि जब यहां कोई रोजगार ही नही है तो सिर्फ वोट देने क्यों आए। अगर यहां आए तो मौजूदा नौकरी भी जोखिम में पड़ सकती है।
चाय बागान की श्रमिक महिला बिरशी उरांव ने कहा कि बागान में कामकाज नहीं होने के कारण बेटा दूसरे राज्य में काम करने गया है और सिर्फ वोट देने के लिए नहीं आएगा। सपना मुंडा ने कहा कि चुनाव आते ही लोग हाल पूछने चले आते हैं। इससे पहले किस हाल में जी रहे हैं इसकी खबर नहीं लेते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेता हर समस्या को हल करने का वादा करते हैं पर भूल जाते हैं। वर्षों से इन्हीं वादों के सहारे जी रहे हैं।

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