महानगरः बसों में मनमाना किराया, प्रशासन मौन

एक तरफ बस किराये में वृद्धि की मांग कर रहे बस संगठन
दूसरी तरफ आम यात्रियों से अपनी मर्जी के किराये ले रहे कंडक्टर
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः निजी बसों ने अपनी परिसेवा राज्य सरकार की ओर से सख्ती में ढील के बाद जारी की है। इस बीच देखा जा रहा है कि बसों में प्रायः सभी रूटों में ही अतिरिक्त किराये कंडक्टर ले रहे हैं। अक्सर ही बसों में यात्री व कंडक्टरों के बीच बहस होती नजर आती है। दूसरी तरफ प्रशासन इस मुद्दे को लेकर मौन है। पिछले साल हुए लॉकडाउन के बाद जब बसों की परिसेवा शुरू हुई थी, उस दौरान भी देखा गया कि बसों में किराये अधिक लिए जा रहे थे। हालांक‌ि उस दौरान पुलिस से लेकर प्रशासन ने इस पर कार्रवाई की थी। इस बार स्थितियां बिल्कुल प्रतिकूल हैं।
जहां था 7/8 रुपये किराया वहां 10 से 15 रुपये ले रहे बस कंडक्टर
आलम यह है कि जहां 7/8 रुपये बस का किराया था, वहां बस कंडक्टर यात्रियों से 10 से 15 रुपये ले रहे हैं। इसके अलावा जहां 10 रुपये बस का किराया था वहां 15 से 20 रुपये तक लिया जा रहा है। इसे लेकर विरोध करने पर बस कंडक्टर यात्रियों को नीचे उतरने तक की सलाह दे डालते हैं। यह स्थिति केवल निजी बसों में ही नहीं बल्कि मिनी बसों में भी है।
क्या कहना है बस संगठन का
ऑल बंगाल बस-मिनी बस समन्वय कमेटी के महासचिव, राहुल चटर्जी ने कहा कि देखा जा रहा है कि कई बस रूटों में अतिरिक्त किराया लेने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांक‌ि बस संगठन के प्रतिनिधि इसकी जांच स्वयं नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए आवश्यक है कि सरकार की ओर से भी ठोस कार्रवाई की जाए। हम लगातार बस किराये में वृद्धि की मांग परिवहन विभाग व सरकार से कर रहे हैं। बस किराये का रेग्युलराइजेशन होना आवश्यक है।
कुछ इस प्रकार लिए जा रहे किराये
किराया पहले- किराया अब निजी बस
7/8 – 10-15 रु.
10 – 15-20 रु.

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