वेल्लोर में सशर्त होगी स्वास्थ्य साथी कार्ड से चिकित्सा

अब तक डेढ़ हजार मरीज स्वास्थ्य साथी से वहां करा चुके हैं चिकित्सा
राज्य को प्रति महीने भरना पड़ता है 14-15 करोड़ तक का बिल
अक्टूबर 2020 में इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था वेल्लोर को
स्वास्थ्य साथी कार्ड का मिसयूज न हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने लिया अहम फैसला
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि वेल्लोर में भी मरीजों को स्वास्थ्य साथी कार्ड से चिकित्सा में मदद मिल रही है। राज्य सरकार की ओर से इसका गलत फायदा न उठाया जाए, इसके लिए एक अहम फैसला लिया गया है। स्वास्थ्य भवन के अधिकारी के मुताबिक स्वास्थ्य साथी के ऑनलाइन पोर्टल में वेल्लोर को लेकर नया नियम कानून बनाया गया है। पहले इसके लिए यहां ऑनलाइन आवेदन किया जाएगा। इसके बाद यहां के डॉक्टर आवेदन की जांच करेंगे। यदि आवेदन सही होगा यानी कि पश्चिम बंगाल में उक्त बीमारी के इलाज की सुविधा नहीं है तब जाकर वेल्लोर में उपचार की अनुमति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह कहा था
कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि बंगाल में चिकित्सा का अच्छा बुनियादी ढांचा है, तब भी कई लोग हेल्थ कार्ड लेकर वेल्लोर जा रहे हैं। इससे राज्य का बहुत सारा पैसा दूसरे राज्य में जा रहा है। हम चाहते हैं कि स्वास्थ्य साथी का पैसा बंगाल में ही रहे। इसके बाद राज्य सरकार ने यह फैसला लिया। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सीएमसी वेल्लोर अस्पताल अक्टूबर 2020 में इस प्रोजेक्ट में शामिल हुआ। हालांकि राज्य सरकार ने शुरू में वहां मुफ्त इलाज के लिए महीने में तीन से चार करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, लागत बढ़ती ही जा रही है। वर्तमान में, सरकार केवल वेल्लोर में स्वास्थ्य साथी के उपयोगकर्ताओं को चिकित्सा उपचार प्रदान करने के लिए प्रति माह लगभग 14-15 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस कार्ड के जरिए अब तक बंगाल के करीब डेढ़ हजार लोग वेल्लोर में इलाज करा चुके हैं।
संपन्न लोग कुछ बहुत ही सरल उपचार के लिए भी वेल्लोर जाने लगे थे
स्वास्थ्य भवन के एक अधिकारी ने कहा कि समस्या कहीं और थी। बहुत से संपन्न लोग कुछ बहुत ही सरल उपचार और ऑपरेशन के लिए वेल्लोर जा रहे हैं। हालांकि, ये इलाज बंगाल के कई सरकारी और निजी अस्पतालों में किया जाता है। जिन लोगों को अपने व्यवहार के लिए वास्तव में इस कार्ड की आवश्यकता है, वे मुश्किल में हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री कलकत्ता मेडिकल कॉलेज के कॉर्ड ब्लड बैंक की गतिविधियों पर गुस्सा भी थी। कैंसर के इलाज के लिए बंगाल से बाहर जाने के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि मैंने बहुत पहले ही मेडिकल कॉलेज में कॉर्ड ब्लड बैंक चालू करवाने को कहा था लेकिन अब तक यह शुरू नहीं हुआ है। वहीं जो मरीज अब वेल्लोर जाने वाले थे, अब नयी प्रक्रिया से उन्हें गुजरना होगा।

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