तृणमूल के कई नेता तो भाजपा में गये मगर कार्यकर्ता नहीं !

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल के कई नेता अन्य पार्टी में शामिल हो गये। इनमें तृणमूल के विधायक से लेकर सांसद भी रहे। जिस जनाधार और कार्यकर्ताओं के बल पर ये नेता 2016 का चुनाव जीते, उन्हें लगा कि उनके दूसरी पार्टी में जाने से कार्यकर्ता भी उनका साथ देंगे मगर कई जगहों पर सम्भवत ऐसा हुआ नहीं। हावड़ा, उत्तर 24 परगना, शिल्पांचल, नार्थ बंगाल व अन्य कई जगहों से कार्यकर्ताओं ने अपने उन नेताओं के दूसरी पार्टी में जाने के खिलाफ हो गये। नाम नहीं छापने की शर्त पर हावड़ा के उन अंचलों के कई कार्यकर्ताओं का कहना है जहां से तृणमूल से कई भाजपा में शामिल हुए हैं, हमने जिसके खिलाफ लड़ाई की थी आज उसका साथ ही भल ही हमारे नेता देंगे तो हम उनके साथ नहीं है। हमें ठगा हुआ महसुस हो रहा है।
…तो क्या डूब सकती है कईयों की नैया
राजनीति में कर्मियों की भूमिका बेहद ही अहम मानी जाती है, जीत दिलाने में जनता ही जर्नाद्धन है। लेकिन कर्मियों की भूमिका भी बेहद अहम मानी जाती है। राजनीतिज्ञों की माने तो अगर वाकई में कार्यकर्ता का साथ नहीं मिला तो शायद चुनाव में इनकी नैय्या पार लगाना मुश्किल होगा।
अपने ही क्षेत्र में विरोध का करना पड़ा था कईयों को सामना
अभी हाल में ऐसे कई घटनाएं इसके गवाह बने। पार्टी बदलने वाले कई नेताओं को अपने ही इलाकों में विक्षोफ का सामना करना पड़ा जहां वे कभी शान से पपिभ्रमण किया करते थे। कई जगहों पर तो काफी विरोध भी हुए। कर्मियों के एक वर्ग इससे काफी गुस्सा भी देखा गया।

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