को‌विड इलाज में कई दवाएं हुईं बाहर, डीजीएचएस ने जारी की नई गाईडलाइन

बिना लक्षण वाले कोविड मरीजों को दवा की भी जरूरत नहीं
डॉक्टर नहीं लिख सकेंगे बेवजह के टेस्ट भी
प्लाज्मा थेरेपी के बाद अब कई दवाएं भी हुईं सूची से बाहर
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज को लेकर अब नई गाइडलाइन जारी हुई है। साथ ही कई दवाओं को इलाज से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में इन दवाओं को अब डॉक्टर नहीं लिख सकेंगे। दरअसल देखा रहा है कि जैस-जैसे कोविड अपना ट्रेंड बदल रहा है इलाज की पद्धति में भी काफी बदलाव आ रहे हैं। पहले प्लाज्मा थेरेपी को इलाज से बाहर किया गया था। अब कई दवाओं को हल्के व गंभीर मरीजों के इलाज की सूची से बाहर रखा गया है। पिछले दिनों कोरोना वायरस के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी और रेमडेसिवीर को हटाया गया था। अब नया दिशा-निर्देश केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने कोविड -19 के इलाज को लेकर जारी किया है।
क्या है नई गाईडलाइन
नई गाईडलाइन के मुताबिक बिना लक्षण वाले और हल्के कोविड के मामलों के लिए एंटीपीयरेटिक (बुखार) और एंटीट्यूसिव (कोल्ड) को छोड़कर सभी दवाओं को हटा दिया गया है। उन सभी दवाओं को प्राथमिक तौर पर कोरोना इलाज से बाहर कर दिया गया है, जिन्हें डॉक्टर बिना लक्षण वाले या हल्के लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों के लिए लिखते थे।
दरअसल हल्के लक्षण वाले या गंभीर लक्षण वाले मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, आइवरमेक्टिन, डॉक्सीसाइक्लिन, जिंक, मल्टीविटामिन आदि दवाइयां डॉक्टर लिखते थे। हालांकि अब इन सभी को सूची से बाहर कर दिया गया है।
डॉक्टरों निर्देशित किया गया है कि वे जरूरी न होने पर मरीज को सीटी स्कैन कराने की राय भी ना दें। साथ ही बिना लक्षण वाले कोरोना के मामलों के लिए गाइडलाइन में कहा गया है कि इन्हें किसी दवा की आवश्यकता नहीं है। दिशा-निर्देश में स्वस्थ संतुलित आहार पर जोर है।
इसके अलावा यह भी कहा गया है कि हल्के मामलों में बुखार, सांस फूलने, ऑक्सीजन लेवल या किसी भी लक्षण पर खुद ख्याल रखा जाए। स्थिति नियंत्रित न होने पर डॉक्टरों की सलाह या अस्पताल का रुख किया जा सकता है। खांसी के लिए 5 दिनों तक दिन में दो बार 800 एमसीजी की खुराक पर बुडेसोनाइड लिया जा सकता है। इसके अलावा किसी और दवा की आवश्यकता मरीजों को नहीं है।
नए-नए शोध के आधार पर बदलाव
वेस्ट बंगाल मेडिकल काउंसिल के सदस्य व इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कोलकाता शाखा के उपाध्यक्ष डॉ.पी.के.नेमानी ने कहा कि दरअसल कोविड के ट्रेंड बदल रहे हैं। ऐसे में पूरे विश्व में नए-नए शोध हो रहे हैं। इसके आधार पर भी इलाज की पद्धति में काफी बदलाव हो रहा है। वैश्विक तौर पर कई दवाओं का प्रभाव अधिक नहीं नजर आया था, ‌इस कारण भी कुछ दवाओं को बाहर रखा गया है। इससे कोविड मरीजों के इलाज पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसकी वजह है कि अब कई नई दवाएं व इलाज की पद्धति भी शामिल हुई है।

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