नयी राज्य कमेटी से हटाये गये कई नेता अब देंगे पेशे और परिवार पर ध्यान

सायंतन के घर पहुंचे तृणमूल के नेता, की चाय पर चर्चा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोलकाता नगर निगम चुनाव में भाजपा की सीटें तो पिछली बार की तुलना में कम हुई ही, इसके साथ ही वोट प्रतिशत भी कम हुआ है जिस कारण पार्टी तीसरे स्थान पर जा पहुंची। इसके तुरंत बाद ही प्रदेश भाजपा नेतृत्व द्वारा संगठन में बड़े बदलाव किये गये। नयी राज्य कमेटी में कई नेताओं को हटा दिया गया। कई नेता ऐसे हैं जिन्हें इनचार्ज से को-इनचार्ज बना दिया गया तो कई की प्रदेश महास​चिव से पदावनति कर दी गयी। इस कारण निश्चित तौर पर नयी राज्य कमेटी को लेकर कई पुराने नेता रोष में हैं। कई नेताओं का कहना है कि इतने वर्षों तक पार्टी की सेवा करने के बाद अब इस तरह बैठा दिया जा रहा है। कई दिनों की छुट्टी पर ये नेता जा रहे हैं। कुछ का कहना है कि अब वे अपने पेशे पर अधिक ध्यान देंगे तो कुछ नेताओं का कहना है कि अपने परिवार को समय देंगे। हालांकि नयी राज्य कमेटी को लेकर कुछ वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं का मानना है कि जो नेता राज्य कमेटी में थे, उनमें से कई केंद्रीय योजनाओं जैसे कि उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य योजनाओं को घर-घर ले जाने में नाकाम रहे। ​जिस तरह केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीजल पर सेस घटाया गया, इसका भी सही ढंग से प्रचार नहीं किया जा सका। प्राकृतिक आपदाओं में केंद्र से मिलने वाले पैसे को लेकर भी सही ढंग से प्रचार नहीं किया जा सका जिस कारण इस तरह के नतीजे आये हैं। वहीं स्थानीय नेता भी घर-घर में पैठ नहीं बना पाये। इधर, नयी राज्य कमेटी से हटाये गये कई नेता इसे लेकर नाराज हैं और उनका मानना है कि जो नेता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके हैं, महासचिव रह चुके हैं, उनकी पदावनति करते हुए मीडिया डिपार्टमेंट में भेज दिया गया है। एक नेता के इस्तीफे की खबर भी है, लेकिन उन्होंने ये बात स्वीकार नहीं की। वहीं प्रदेश भाजपा महासचिव के पद पर रहे सायंतन बसु को इस बार राज्य कमेटी में जगह नहीं मिली है। इससे वह इतने नाराज हो गये कि उन्होंने भाजपा के कई सांगठनिक ग्रुप समेत मीडिया का ह्वाट्स ऐप ग्रुप छोड़ दिया और इसके बाद तृणमूल नेतृत्व से भी बात की। सूत्राें के अनुसार, सायंतन के घर पर ही तृणमूल नेताओं की बैठक हुई थी, इसे चाय पर चर्चा कहा जा रहा है, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पायी। वहीं सायंतन बसु ने कहा कि वह लगातार 6 वर्षों तक प्रदेश महासचिव थे, ऐसे में हमेशा पद पर वे ही रहेंगे, इसका कोई कारण नहीं है। तृणमूल में जाने की बात पर उन्होंने कहा कि यह सौजन्यमूलक मुलाकात थी और मैं भाजपा आदर्श के लिए करता हूं, पद के लिए नहीं।

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