मानिक को एफिडेविट के साथ देना पड़ेगा संपत्ति का ब्योरा

कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने प्राइमरी स्कूल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मानिक भट्टाचार्या को अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा एफिडेविट के साथ कोर्ट में दाखिल करना पड़ेगा। जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने मंगलवार को यह आदेश दिया। यहां गौरतलब है कि जस्टिस गंगोपाध्याय ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से मंगलवार को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया था।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने यह स्पष्ट कर दिया कि एफिडेविट में वे अपनी जिन संपत्तियों का ब्योरा देंगे भविष्य में वही उनकी संपत्ति मानी जाएगी। भविष्य में इससे इतर कोई संपत्ति अगर मिलती है तो वे उन पर अपना दावा नहीं पेश कर पाएंगे। एफिडेविट में यह उन्हें स्पष्ट करना पड़ेगा। यहां गौरतलब है कि उन्होंने मंगलवार को कोर्ट में ओथ के साथ अपनी संपत्तियों का ब्योरा दिया जिसे रिकार्ड किया गया। संपत्ति के इस ब्योरे में उनकी, उनकी पत्नी का और विवाह से पूर्व उनके पुत्र और पुत्री के नाम संपत्ति शामिल है। जस्टिस गंगोपाध्याय ने मानिक भट्टाचार्या से कहा कि आप विधायक हैं इसलिए आपको कटघरे में खड़ा नहीं कर रहा हूं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीएचडी करने के बाद उन्हें डॉ. की डिग्री मिली थी। उन्होंने एलएलएम की डिग्री हासिल की है, लेकिन एडवोकेट के रूप में कभी प्रैक्टिस नहीं किया। वे 1998 से 2014 तक जोगेश चंद्र लॉ कालेज के प्रिंसिपल रहे थे। इसके बाद से प्राइमरी स्कूल बोर्ड के अध्यक्ष बनाए गए थे। अपनी संपत्ति का ब्योरा देते हुए बताया कि वे पहले मेस में रहते थे और इसके बाद जादवपुर में एक छोटा सा फ्लैट खरीदा था और उसी में रहते हैं। इसके साथ ही बताया कि जादवपुर में ही उनका एक और फ्लैट है। बच्चों के बड़े होने के बाद उसे खरीदा था। गांव में उनका एक मकान और थोड़ी सी जमीन है जो उन्हें विरासत में मिली है। इसके साथ ही बताया कि ‍उन्होंने नयाबाद क्षेत्र में काफी साल पहले दस हजार रुपए में जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था। जेवर और सोने का बारे में जस्टिस गंगोपाध्याय के सवाल करने पर कहा कि तत्काल तो इसका जवाब नहीं दे सकता, अलबत्ता जानकारी कर के दे सकता हूं। इसके साथ ही जस्टिस गंगोपाध्याय ने उनसे सवाल किया कि क्या बोर्ड दूसरा पैनल प्रकाशित कर सकता है तो उनका जवाब था कि स्कूल रूल्स में एडिशनल पैनल का जिक्र है और उसी का हवाला देते हुए कई बार पैनल प्रकाशित किया जा सकता है। सात भाषाओं के शिक्षा अधिकार के तहत पैनल प्रकाशन किया गया था। यहां गौरतलब है कि जस्टिस गंगोपाध्याय ने सोमवार को उन्हें अध्यक्ष पद से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। उनसे पैनल के बारे में और कोई सवाल नहीं किया गया। इस मामले की अगली सुनवायी पांच जुलाई को होगी।

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