ममता का चुनावी प्लान : मुद्दे पुराने, नयी ट्रिक लेकर उतरीं मैदान में

mamata protest

विरो​धियों के निशाने पर 2016 के ही ज्यादातर मुद्दे
नया कुछ है तो 5 रुपये में थाली, तबीयत बिगड़ी तो फ्री चिकित्सा
मिशन बंगाल में पकड़ मजबूत करने के लिए तृणमूल का नया प्लान

सोनू दुबे ओझा
कोलकाता : वो साल 2016 था, यह 2021 है। उस दौर में भी सत्ता की लड़ाई थी, इस बार भी चुनावी दंगल है। वो ममता बनर्जी के लिए दूसरी बार सरकार बनाने की जिद थी तो इस बार जीत की तीसरी हैट्रिक बनाने का जोर है। इन सभी में ममता बनर्जी के सामने विरोधियों के जो आरोप थे वही आरोप लगभग इस चुनाव में भी मुद्दे बनकर सामने आये हैं। नारदा-सारधा में तृणमूल नेताओं के नाम, भ्रष्टाचार के आरोप, लेफ्ट-कांग्रेस का मेल और सामने भाजपा। कुछ अलग है तो भाजपा की स्थिति जो तब जमीन पर थी और अब वह जमीनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। इन सभी के बीच पुराने मुद्दों को लेकर ममता बनर्जी नये प्लान के साथ विधानसभा के इस चुनावी संघर्ष में उतरी हैं। यह प्लान कुछ और नहीं बल्कि आम जनता के बीच ऐसी योजनाओं की व्यवस्था कर देना है जिससे तृणमूल की पकड़ उनके बीच और मजबूत हो सके। जानकारों की माने तो इस बार तृणमूल इसी ट्रिक के साथ लोगों के बीच पहुंच रही है।
दीदी का ट्रम्प कार्ड : जनता को दी सहूलियतों की सौगात
बजट में खाना और फ्री चिकित्सा की व्यवस्था एक इंसान के लिए बहुत कुछ मायने रखता है। इसी सोच के साथ ममता सरकार ने 5 रुपये में मां की थाली की व्यवस्था की है जो लोगों को भरपेट खाना दे रहा है। इसके साथ ही किसी भी बीमारी की नि:शुल्क चिकित्सा व्यवस्था ममता बनर्जी के मेगा प्लान का अहम हिस्सा रहा है। इस क्षेत्र में अलग से फ्री में आंखों की चिकित्सा की भी व्यवस्था हाल ही में मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी ने की है। शिक्षा को भी ममता बनर्जी ने उतना ही महत्व दिया है और चुनाव से पहले करीब 25 लाख स्कूली छात्रों (क्लास 11-12) में फ्री साइकिल देने की घोषणा की है। दीदी इन सभी में मुस्लिम वोटरों को भी नहीं भूलीं तथा उन छात्रों के लिए प्रमाणपत्र की व्यवस्था की गयी है। पढ़ाई में दिक्कत न हो, इसके लिए फ्री टैबलेट भी बच्चों को दिया जा रहा है।
राजनीतिक मंच पर अपनों से ही घिरी तृणमूल
जनता के बीच ममता बनर्जी जहां विकासमूलक कार्यों को तवज्जो दे रही हैं, वहीं राजनीतिक मंच पर पार्टी को अपने ही बागी हो चुके नेताओं से घिरना पड़ रहा है। चुनावी मुद्दों की बात करें तो 2016 में ज्यादातर जो मुद्दे विपक्ष ने तृणमूल के खिलाफ उठाकर घेरा था उन्हीं मुद्दों का चक्रव्यूह इस बार भी ममता के इर्द-गिर्द है। एजेंसियों के आने-जाने से लेकर बेमेल कांग्रेस और वाममोर्चा की जोड़ी इस बार भी ममता को टक्कर दे रही है। कुछ नया है तो वह भाजपा का बंगाल में नया उभरा हुआ रूप, जिसने धर्म का नया रंग इस चुनावी मुद्दे में जोड़ा है। उस बार भी दीदी ने निराशाओं के बीच ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, इस बार भी इतिहास खुद को दोहरायेगा या परिवर्तन की बयार डाल बदल चुके पक्षियों को मौका देगी, यह तो जनता ही तय करने वाली है।

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