ममता के कथित आवाज वाला ऑडियो वायरल

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पहले चरण की 30 सीटों पर जब बंगाल में मतदान चल रहा था, उसी समय राज्य की राजनीति में एक ऑडियो टेप को लेकर बवाल मच गया। उस ऑडियो टेप की सत्यता सन्मार्ग प्रमाणित नहीं कर पाया है। हालांकि प्रदेश भाजपा का दावा है कि फोन पर एक ओर मुख्यमंत्री व नंदीग्राम की तृणमूल उम्मीदवार ममता बन​र्जी तो दूसरी ओर, भाजपा के तमलुक सांगठनिक जिला के उपाध्यक्ष प्रलय पाल हैं। उस ऑडियो टेप में सुना जा रहा है एक महिला (जिसे ममता बनर्जी की आवाज कहा ​जा रहा है), प्रलय से चुनाव में सहायता करने की अपील कर रही हैं। ऑडियो टेप में कहा जा रहा है, ‘नंदीग्राम जिताने में तुम्हे मेरी सहायता करनी चाहिये। देखो, मुझे पता है कि तुम्हारी कुछ शिकायतें हैं, लेकिन ये अधिकारियों के कारण है क्योंकि उन्होंने मुझे नंदीग्राम या पूर्व मिदनापुर में जाने नहीं दिया। आगे से मैं इसका ध्यान रखूंगी।’ हालांकि प्रलय अपीलकर्ता से कह रहे हैं ​कि पार्टी के खिलाफ जाकर वह तृणमूल का समर्थन नहीं करेंगे। प्रलय की ओर से कहा गया, ‘दीदी, आपने मुझे फोन किया, मैं सम्मानित हूं, लेकिन मैं अधिकारियों के साथ धोखा नहीं कर सकता क्योंकि मेरे बुरे समय में वे मेरे साथ खड़े थे।’ प्रलय ने बाद में कहा कि शनिवार की सुबह ही मेरे पास दीदी ममता बनर्जी का फोन आया। उन्होंने मुझे सहायता करने के लिए कहा, लेकिन मैंने कह दिया कि मैं भाजपा के लिए काम कर रहा हूं और पार्टी को धोखा नहीं दे सकता।
भाजपा के वरिष्ठ नेता व बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने चुनाव आयोग कार्यालय में उस ऑडियो टेप को सुनाते हुए कहा कि ममता बनर्जी का फोन करना यह दर्शाता है कि वह अपनी हार तय समझ चुकी हैं। ऑडियो टेप की सत्यता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी जवाबदारी के साथ कह रहा हूं कि वह याचना कर रही हैं। यह दर्शाता है कि उन्होंने हार स्वीकार कर ली है।’ वहीं बंगाल भाजपा के सह प्रभारी अमित मालवीय ने इसे लेकर ट्वीट किया, ‘नंदीग्राम में ममता अपनी हार तय समझकर ही अब भाजपा को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं।’ इधर, इस मुद्दे पर तृणमूल का कहना है कि टेप की सत्यता की जांच नहीं की गयी है, लेकिन ममता बनर्जी के पार्टी के एक पूर्व कार्यकर्ता को फोन करने में कुछ गलत नहीं है। तृणमूल के प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, ‘क्लिप की जांच नहीं की गयी है। ये असली है या नकली, यह भी हम नहीं जानते, लेकिन किसी नेता के उसके पूर्व नेता या कैडर को फोन करने में कुछ गलत नहीं है। राजनीति में ये पूरी तरह स्वाभाविक है।’

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