राष्ट्रीय राजनीति में ममता की सक्रियता काट सकती है कांग्रेस का हाथ !

त्रिपुरा, असम, गोवा के बाद यूपी में दिलचस्प होगी तृणमूल की एंट्री
बड़ा सवाल : क्या सोनिया को रिप्लेस कर रही हैं ममता दीदी
सोनू ओझा
कोलकाता/नई दिल्ली : ममता बनर्जी अपनी पार्टी के साथ राष्ट्रीय राजनीति में सक्रियता से बढ़ रही हैं। त्रिपुरा में जमीन मजबूत करने की जुगत में पार्टी लगी हुई है। असम और गोवा में भी तृणमूल की एंट्री हो चुकी है। अब राजनीतिक परिदृश्य से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में तृणमूल सुगबुगाहट बढ़ा रही है। देखा जाए तो ये सभी राज्य भाजपा शासित राज्य हैं जहां से तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बंद्योपाध्याय कमल उखाड़ने का चैलेंज दे चुके हैं। चैलेंज बड़ा है साथ ही कठिन भी है क्योंकि इन राज्यों में भाजपा अगर सरकार की कमान संभाली है तो कांग्रेस जैसी बड़ी पार्टी प्रबल मजबूत विपक्ष होने का दावा कर अपनी रणनीति बना रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो इस पूरे राजनीतिक समीकरण में भाजपा को कितना नुकसान होगा यह कहना जल्दबाजी होगी लेकिन कांग्रेस ने अगर तृणमूल को हल्के में लिया तो बेशक वह कांग्रेस के हाथ काट सकती है।
तृणमूल ने तैयार किया मास्टर प्लान
अगले साल 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन राज्यों के लिए तृणमूल एक मास्टर प्लान तैयार कर रही है। पार्टी के सांसद व प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन इन दिनों गोवा की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि तृणमूल में ‘आलाकमान संस्कृति’ नहीं है। इसे देखते हुए जिस राज्य में हम जा रहे हैं वहां के स्थानीय नेताओं को ही चुनावी मैदान में उतारने की योजना है।
सोनिया का रिप्लेसमेंट बनने की तैयारी में दीदी
पिछले कुछ दिनों से तृणमूल जिस तरह कांग्रेस पर हमलावर हो रही है, वह इशारा कर रहा है कि सोनिया गांधी की जगह विपक्ष का चेहरा ममता बनर्जी को बनाने की तैयारी चल रही है। उदाहरण पंजाब है जहां कांग्रेस लगभग बिखर सी गयी है और वहां पार्टी नेताओं को जुटाने में राहुल और प्रियंका गांधी लगातर बने हुए हैं। नौबत यह है कि पार्टी के भीतर ही दबे स्वर में विरोध हो रहा है जिसका फायदा तृणमूल को मिलेगा। जानकारों की माने तो 2024 के आम चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रमुख विपक्षी चेहरा बनने के लिए ममता बनर्जी को पार्टी संगठन का विस्तार दूसरे राज्यों में करना ही होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने बताया कि तृणमूल उन छोटे राज्यों पर फोकस कर रही है जहां क्षेत्रीय पार्टियां नहीं हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को तोड़ रही तृणमूल
पहले सुष्मिता देव फिर लुइजिन्हो फलेरियो को तृणमूल में लाकर पार्टी ने कांग्रेस को तोड़ने का जो प्रयास किया है वह मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में भी स्थानीय कांग्रेस नेताओं को तृणमूल में लाने की जुगत पार्टी लगा रही है। सूत्रों की माने तो प्रदेश में प्रशांत किशोर कांग्रेस के कई क्षुब्ध नेताओं के संपर्क में हैं। इस फेहरिस्त में ललितेशपति त्रिपाठी का नाम भी शामिल है, जो जल्द तृणमूल का झण्डा थाम सकते हैं।

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