NHRC की रिपोर्ट पर बंगाल सरकार का हलफनामा, कहा…

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में इस साल हुए विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपना हलफनामा दायर कर दिया है। एनएचआरसी रिपोर्ट में चुनाव के बाद की हिंसा के तमाम आरोपों का ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार ने हाईकोर्ट में दिए अपने हलफनामें में खंडन किया है। हलफनामे में कहा गया है कि रिपोर्ट में हिंसा को लेकर जो बातें कही गई हैं, उनमें सच्चाई नहीं है। हाईकोर्ट इस मामले पर बुधवार को सुनवाई करेगा।

बंगाल के गृह सचिव बीपी गोपालिका ने हलफनामें में कहा है कि विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में राजनीतिक हिंसा की घटना नहीं हुई है। एनएचआरसी की टीम राज्य की सत्तारूढ़ टीएमसी सरकार के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रस्त थी, इसलिए वो ऐसा दावा कर रही है। कहा गया है कि इस समिति के सदस्यों के भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार के साथ काफी नजदीकी रिश्ते हैं। कई सदस्य बाकायदा भाजपा के मेंबर हैं। ऐसे में रिपोर्ट में कई मनगढ़ंत बाते करते हुए किसी भी तरह से राज्य सरकार को बदनाम करने की पूरी कोशिश की गई है।

हलफनामे में कहा गया है कि भाजपा नेता आतिफ रशीद एनएचआरसी पैनल में जानबूझकर रखा गया। वो राज्य सरकार को लेकर पहले से आलोचना करते रहे हैं और उनको बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में नकारात्मक रिपोर्ट देनी ही थी। वो रिपोर्ट में क्या लिखेंगे, ये पहले से पता था और भी ज्यादातर लोग इसी तरह के विचार वाले रखे गए।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष 95 पेज का एफिडेविट दिया है। इसमें एनएचआरसी के सदस्यों के भाजपा से संबंधों, उनके पूर्व के बयानों को बताते हुए रिपोर्ट के एक-एक बिंदु का खंडन किया गया है। बता दें कि चुनाव बाद हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार सहित सभी पक्षों को 26 जुलाई तक हलफनामा जमा देने का निर्देश दिया था। जिसके बाद ये हलफनामा दिया गया है। मामले की सुनवाई बुधवार (28 जुलाई) को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी।

 

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