पहाड़ की स्थायी राजनीतिक समस्या का समाधान मैं ही करूंगी : ममता

जलपाईगुड़ी : पहाड़ की समस्या का स्थायी राजनीतिक समाधान हम ही करेंगे। दार्जिलिंग पहाड़ और डुआर्स में दंगा नहीं होगा बल्कि वे एक साथ मिलकर विकास के पथ पर आगे बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को जलपाईगुड़ी के एबीपीसी मैदान में आयोजित जनसभा से यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग पहाड़ की समस्या का समाधान मैं ही करूंगी यह किसी और के वश की बात नहीं है।

पहाड़ की जनता और यहां के नेताओं को बरगलाकर अब तक भाजपा ने यहां से सांसद जीते हैं लेकिन अब यह बात विमल-रोशन की समझ में आ गयी है। यह अच्छी बात है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आते ही गोरखालैंड का मुद्दा भाजपा उठाती रहती है। यह हास्यास्पद है। भाजपा के पास इस समस्या का कोई समाधान ही नहीं है केवल राजनीतिक स्वार्थ के कारण आज तक पहाड़ की जनता को वह मूर्ख बनाती रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ और डुआर्स में भाजपा अक्सर दंगा लगाने की रणनीति पर काम करती है जिसका अब यहां की जनता पुरजोर विरोध करेगी और भाजपा का सूपड़ा अब उत्तर बंगाल से साफ हो जायेगा।

एक भी बागान का अधिग्रहण नहीं

चाय श्रमिकों का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि पहाड़-डुआर्स के चायबागान श्रमिकों को केन्द्र सरकार ने धोखा दिया है। पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त यहां के बंद पड़े सात चायबागानों के अधिग्रहण का आश्वासन दिया गया मगर बाद में वायदे को भूल मुंह-मोड़ लिया गया। एक भी बागान का अधिग्रहण नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज जिधर भी नजर डालेंगे और जो विकास दिखेगा वह तृणमूल सरकार की ही देन है। ममता ने बताया कि डुआर्स के 370 चायबागानों को चाय सुंदरी परियोजना के अंतर्गत लाकर हमने यहां के वैसे श्रमिक जिनके पास मकान नहीं हैं, उन्हें पक्के मकान देने का फैसला किया।

वेतन बढ़कर 176 रुपये हुआ

चायबागानों के श्रमिकों के वेतन को 67 रुपये से बढ़ाकर 176 कर दिया गया है। उन्हें हम जो 37 किलोग्राम अनाज दे रहे हैं वह पूरी तरह निःशुल्क है जबकि भाजपा शासित असम में महज 20 किलोग्राम अनाज 11 रुपये प्रतिकिलोग्राम की दर से दिये जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चायबागानों के लिए राज्य सरकार ने 100 करोड़ रुपये का एक वेलफेयर फंड भी बनाया जिससे चायबागानों के श्रमिक लाभान्वित हो रहे हैं।

गलती हुई है तो जनता से माफी मांगें कार्यकर्ता

ममता ने तृणमूल के कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि अगर आपसे जाने-अनजाने में कोई गलती हुई है तो जनता से माफी मांग लें। उन्होंने जनता को अभिभावक बताते हुए कहा कि तृणमूल के कार्यकर्ताओं को आम जनता के करीब जाकर यह देखना चाहिए कि आखिर उन्हें तृणमूल से किस बात की नाराजगी है। शुभेन्दु अधिकारी का नाम लिए बगैर ममता ने कहा कि 10 साल तक यहां पूरा फायदा उठाने के बाद अब दूसरी पार्टी के साथ मिलना तृणमूल में बर्दाश्त नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पार्टी सत्ता में होती है उसके कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होती है और वह झूठ नहीं बोलता। वह जनता के कार्य करने की कोशिश करता है लेकिन जो पार्टी सत्ता में नहीं होती है वह गैरजिम्मेदार रवैया अपनाते हुए ना केवल झूठ बोलती है बल्कि जनता को बरगलाती भी है, क्योंकि उसकी कोई जवाबदेही नहीं होती और चुनाव के बाद वह जनता से भी कन्नी काट लेती है।

उन्होंने सवाल पूछा कि आखिर क्या गलती हो गयी थी कि उत्तर बंगाल में हमें लोकसभा की एक भी सीटें नहीं मिलीं ? उन्होंने इसके लिए आरएसएस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे जनता के बीच भ्रम और झूठ फैलाकर स्वार्थ की राजनीति करते रहे। उन्होंने कहा कि आरएसएस विवेकानंद या रामकृष्ण मिशन जैसा संगठन नहीं है। इसका एक राजनीतिक एजेंडा है और उसे पूरा करने के लिए यह कुछ भी कर गुजरता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को बताया कि दुनिया में शायद कोई देश या पार्टी नहीं होती जिसने जनता के लिए इतना काम किया। स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसुविधाएं देने में हमारी सरकार पूरे देश में अव्वल है। इसलिए अब जनता के बीच जाकर उसका प्रचार-प्रसार करें और जनता को बताएं कि उन्हें क्या मिला और पूछें कि उन्हें और क्या चाहिए? उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि कुछ ऐसा करें जिससे भाजपा दुबारा बंगाल में सिर नहीं उठा सके। इस दौरान तृणमूल की नेता और विधायक मिताली राय की मांग पर उन्होंने कहा कि जल्द ही बानरहाट और क्रांति को नये ब्लाॅक के तौर पर मान्यता दे दी जायेगी।

 

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