…चारों तरफ बाजार खुले, फिर हम ही महरूम क्यों ?

हर महीने का 200 से 300 कराेड़ हो रहा लॉस ऑफ​ बिजनेस
सिटी सेंटर 1, साल्टलेक : कुल स्पेस : 4 लाख स्क्वायर फीट, दुकानें : 322
सिटी सेंटर 2, न्यूटाउन : कुल स्पेस : 5.5 लाख स्क्वायर फीट, दुकानें : 334
साउथ सिटी मॉल : कुल स्पेस : 11 लाख स्क्वायर फीट, दुकानें : 140+
क्वेस्ट मॉल : कुल स्पेस : 4 लाख स्क्वायर फीट, दुकानें : 130
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार की घोषणा के बाद रिटेल दुकानें खुल गयी हैं, गाड़ियों की संख्या भी सड़कों में बढ़ी है। आगे जिस तरह कोरोना महामारी की परिस्थिति स्वाभाविक होगी, उसी तरह अन्य चीजें भी अनलॉक की ओर बढ़ेंगी। ऐसे में अगर बात करें महानगर के शॉपिंग मॉल्स की तो कोरोना गत 30 अप्रैल से महानगर के शॉपिंग मॉल्स बंद हैं। ऐसे में अब मॉल प्रबंधन की ओर से सवाल पूछा जा रहा है कि चाराें तरफ बाजार खुल गये हैं, फिर हम ही अब तक महरूम क्यों हैं ? एक महीने में औसतन 200 से 300 करोड़ रु. का लॉस ऑफ बिजनेस मॉल बंद रहने के कारण हो रहा है।
शॉपिंग सेंटर एसो​सिएशन ने भेजी राज्य सरकार को चिट्ठी
जानकारी के अनुसार, मॉल्स खुलवाने की मांग करते हुए हाल ही में शॉपिंग सेंटर एसो​सिएशन ऑफ इंडिया (ईस्टर्न चैप्टर) की ओर से राज्य सरकार को चिट्ठी भेजी गयी है। सामान्य समय में मॉल्स को संचालित करने की मांग एसोसिएशन की ओर से की गयी है।
सिटी सेंटर में 600 से अधिक दुकानदार बांट जोह रहे हैं मॉल खुलने की
सिटी सेंटर 1 और 2 को मिलाकर 600 से अधिक दुकानें हैं जिनके दुकानदार माॅल खुलने की बांट जोह रहे हैं। अम्बुजा नेवटिया ग्रुप के होलटाइम डायरेक्टर (मार्केटिंग एण्ड इवेंट्स) रमेश पाण्डेय ने सन्मार्ग से कहा, ‘मॉल पूरी तरह सुरक्षित होते हैं और यहां सोशल​ डिस्टेंसिंग मानते हुए शॉपिंग होती है। केवल डेवलपर का ही 6 से 8 करोड़ का नुकसान हर महीने हो रहा है। इसके अलावा सरकार की जीएसटी और दुकानदारों की बिक्री समेत अन्य सबकुछ को मिलाकर लगभग 300 करोड़ से अधिक का लॉस ऑफ बिजनेस हो रहा है।’ यहां सामान्य तौर पर औसतन फुटफॉल 30 से 35 हजार हर रोज होता था जो मॉल बंद होने के ठीक पहले कम होकर 10,000 के नीचे आ गया था।
10 अप्रैल के बाद से गिरने लगा था मॉल का फुटफॉल
साउथ सिटी ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट मन मोहन बागड़ी ने कहा, ‘10 अप्रैल के बाद से ही मॉल का फुटफॉल गिरने लगा था। पहले जहां हर रोज 75,000 तक फुटफॉल होता था, वो 10 अप्रैल के बाद कम होते – होते मॉल बंद होने तक 15 से 20 हजार प्रतिदिन पर पहुंच गया। इस कारण हमें तो हर महीने 8 से 10 करोड़ का नुकसान हो ही रहा है, इसके अलावा सरकार को भी जो जीएसटी मिलती है, वह नहीं मिल रही। मॉल में कोविड के सभी प्रोटोकॉल माने जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद बंद रहने के कारण एक महीने में लगभग 300 करोड़ का लॉस ऑफ बिजनेस हुआ है।’
नुकसान तो है, लेकिन हम सरकार के साथ
क्वेस्ट मॉल के वाइस प्रेसिडेंट (ऑपरेशन्स) संजीव मेहरा ने कहा, ‘नुकसान तो हो रहा है, लेकिन हम सरकार के साथ हैं। जब सरकार को ठीक लगेगा तो मॉल भी खुलेंगे। महीने में लगभग 20 करोड़ की बिक्री ही होती है। ऐसे में नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है।’
मॉल के खर्चे जारी, लेकिन मॉल हैं बंद, हो रहा भारी नुकसान
फोरम मॉल के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल सराफ ने बताया, ‘मॉल के खर्चे जारी हैं, लेकिन मॉल बंद हैं। ऐसे में लॉस ऑफ बिजनेस काफी ज्यादा हो रहा है। महीने भर का खर्च ही काफी ज्यादा है। स्टाफ को सैलेरी, इलेक्ट्रिक, सिक्योरिटी से लेकर अन्य सभी तरह के खर्चे मॉल के जारी हैं। अब सरकार को मॉल के बारे में भी कुछ सोचना होगा, क्योंकि मॉल अब ये नहीं झेल पा रहे हैं।’

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