सिंदूर खेला के बाद नम आंखों से विदा किया गया मां दुर्गा को

एकादशी के दिन भी कई पूजा पण्डालों के पास उमड़ी भीड़
कोलकाता : ‘बोलाे दुर्गा माई की…जय, आसछे बोछोर आबार होबे’ के नारों से विभिन्न विसर्जन घाट गूंज रहे थे। चारों ओर ढाक और धुनुची डांस के बीच सिंदूर खेला। काफी अद्भुत माहौल विभिन्न विसर्जन घाटों का देखने को मिला जबसिंदूर खेला के बाद मां दुर्गा को नम आंखों से विदाई दी गयी। इसके साथ ही राज्य में 9 दिनों से चल रहे नवरात्र या दुर्गा पूजा का समापन हुआ और लोगों ने अगले बरस जल्दी आने की उम्मीदों के साथ मां को विदा किया।
निकाले गये रंगारंग जुलूस
इस दिन रंगारंग जुलूस निकाले गये। विसर्जन घाट की ओर जाने वाली सड़काें और घाटों पर पुलिस मुश्तैदी से तैनात थी ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न घटे। रंगारंग जुलूस, गाजे-बाजे, सिंदूर और नम आंखों से मां दुर्गा विदा की गयीं। विभिन्न पूजा पण्डालों में सिंदूर खेला का आयोजन किया गया जहां महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाया। वहीं मां दुर्गा की मूर्ति को मिठाई खिलाकर उनका वरण कर उन्हें अगले साल तक के लिए विदा किया गया।
घाटाें पर पुलिस की भारी संख्या में थी तैनाती
कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, घाटों पर पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किये गये थे ताकि शांतिपूर्ण ढंग से प्रतिमाओं का विसर्जन हो सके। इसके अलावा घाटों पर कम संख्या के साथ ही लोगों को जाने की अनुमति दी जा रही थी। केएमसी कर्मी तैनात किये गये थे। क्रेन से तुरंत ही प्रतिमाओं के अवशेषों को निकाला जा रहा था। घाटों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी लगाने के साथ ही ड्रोन का इस्तेमाल ​किया गया था।
शहर में बनाये गये थे कई अस्थायी जलाशय
शहर के कई स्थानों पर अस्थायी जलाशय बनाये गये थे जहां प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा था। भारी क्रेन की मदद से जल प्रदूषण रोकने के लिए तुरंत ही प्रतिमा के अवशेष निकाले जा रहे थे। चारों ओर ‘आसछे बोछोर आबार होबे’ के नारों से महानगर के घाट गूंज रहे थे।
एसएमपी पोर्ट की ओर से भी किये गये थे इंतजाम
श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता की ओर से बाजे कदमतला (बाबू घाट) और जजेज घाट पर वर्ष 2010 से दुर्गा पूजा और काली पूजा के समय में सहयोग किया जा रहा है। इस बार भी उक्त घाटों पर कांट्रैक्टरों के माध्यम से पोंटून माउंटेड क्रेन (4 टन की क्षमता व 10 मीटर आउटरीच), मेकेनाइज्ड बोट (प्रत्येक घाट पर 3), रस्सी से बैरिकेडिंग, प्रत्येक लांच की उपलब्धता और पर्याप्त संख्या में मैनपावर (हर घाट पर 20 अनस्किल्ड वर्कर्स और 2 सुपरवाइजर) की तैनाती की गयी थी। इसके अलावा निमतला घाट पर भी 4 कर्मियों की तैनाती की गयी थी।
एकादशी पर भी कई पूजा पण्डालों के पास हुई भीड़
शनिवार को एकादशी के दिन भी कई पूजा पण्डालों के पास लोगों की भीड़ देखी गयी। शनिवार यानी वीकेंड का दिन होने के कारण अभी तक लोगों के मन से उत्सव का माहौल गया नहीं है। इस दिन जिन प्रतिमाओं का विसर्जन नहीं हुआ, उन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी।

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