महानगर के श्मशान घाटों में लग रही हैं लाशों की कतारें

कोविड मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए चालू किया गया काशी मित्रा घाट
अब तक थे 3 श्मशान घाट और एक कब्रिस्तान
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोरोना की दूसरी लहर तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। इसके साथ ही कोरोना से मरने वालों की संख्या में भी लगातार इजाफा हाे रहा है। ऐसे में महानगर के श्मशान घाटों में लाशों की कतारें लगनी शुरू हो गयी हैं। गत मंगलवार को हालात कुछ ऐसे हो गये थे कि नीमतला श्मशान घाट में अस्पतालों से आने वाले कोरोना मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार रोकना पड़ा। केवल घर में मरने वाले लोगों के ही अंतिम संस्कार किये जा रहे थे। इस कारण कई घण्टों तक कोरोना मृतकों के शव अस्पताल में ही रखे गये थे। इधर, श्मशान घाटों में लाशों की कतारों और भीड़ को कम करने के लिए अब काशी मित्रा घाट को भी चालू किया गया है जहां कोविड से मरने वालों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
बड़ाबाजार के अस्पताल में 27 घण्टे पड़ा रहा शव
कोरोना से एक 75 वर्षीया वृद्धा की मौत बड़ाबाजार के मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल में गत मंगलवार की दोपहर लगभग 12.30 बजे हो गयी थी। हालांकि बेटों के दूर रहने और इसी बीच नीमतला में अंतिम संस्कार रोके जाने के कारण वृद्धा का शव लगभग 27 घण्टे तक अस्पताल में ही पड़ा रहा। बुधवार को अपराह्न लगभग 3.30 बजे वृद्धा के शव को अंतिम संस्कार के लिये ले जाया गया।
अब कुल 4 श्मशान घाट होंगे कोविड मृतकों के लिए इस्तेमाल
अब से कुल 4 श्मशान घाटों को कोविड मृतकों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। पहले ही नीमतला, बिरजू नाला, धापा श्मशान घाट थे। अब इनमें एक और श्मशान घाट काशी मित्रा घाट को भी कोविड मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं बागमारी कब्रिस्तान में कोविड से मृत अल्पसंख्यकों को दफनाया जाता है।
नीमतला में अस्पतालों से शवों को लाना किया गया था बंद
गत मंगलवार को नीमतला में अस्पतालों से शवों का अंतिम संस्कार बंद करना पड़ा था क्योंकि पहले से 22 शव वेटिंग में आ गये थे। केवल घरों में मृतकों के शवों का ही अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इस बारे में पवन टिबरेवाल ने बताया, ‘मंगलवार को नीमतला घाट में शवों की कतार अधिक हो गयी थी जिस कारण कोलकाता नगर निगम की ओर से हमें दोपहर 2 बजे निर्दे​श दिया गया कि अभी अस्पतालों से शव ना लाये जाएं। इस कारण अस्पतालों से शवों को लाना बंद किया गया था। हालांकि बुधवार की सुबह 9-10 बजे से फिर अस्पताल से शवों का संस्कार चालू किया गया।’
एक चूल्ही के कारण नीमतला में हो रही है समस्या
नीमतला में 2 चूल्ही है, लेकिन फिलहाल एक ही चूल्ही काम कर रही है जिस कारण समस्या हो रही है। एक चूल्ही में 20 शव जलाये जा सकते हैं, हर एक शव में 1 घण्टे का समय लगता है। इसी तरह धापा में 4, बिरजू नाला में 2 चूल्ही है। काशी मित्रा घाट में भी 2 चूल्ही है।
एक दिन में ले जा रहे हैं 65-70 शव
कोरोना के शवों को श्मशान घाटों में ले जाने वाले व्यक्ति ने बताया कि एक-एक दिन में कोरोना के कई शव ले जा रहे हैं। ​पिछले कुछ दिनों से रोजाना ही 60 से 70 शवों को श्मशान घाटों तक पहुंचा रहे हैं।
शवाें की नोटिंग के लिए बनाया गया ग्रुप
शवों की नोटिंग के लिए केएमसी की ओर से ग्रुप बनाया गया है जो यह देखेगा कि किसी भी श्मशान घाट में क्षमता से अधिक शव ना पहुंच जाये। कितने शव किन श्मशान घाटों में गये हैं, इस पर ये ग्रुप निगरानी करेगा।

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