उम्रकैद का मतलब 14 साल बाद आजादी नहीं !

राज्य के जेलों में 2000 से अधिक कैदी काट रहे हैं 14 साल से अधिक की सजा
51 साल का सरफराज 24 साल से काट रहा उम्रकैद की सजा
सोनू ओझा 
कोलकाता : आज से 24 साल पहले पिता की हत्या का बदला लेने के लिए गर्मजोशी और गुस्से में आकर सरफराज ने अपने सौतेले मामा को जान से मार दिया था। कोर्ट ने हत्या के आरोप में उसे उम्रकैद की सजा दी। आज सरफराज की उम्र 51 साल है, उसकी बीबी लगातार सरकार से गुहार लगा रही है कि अब उसे रिहाई दे दी जाए क्योंकि उम्रकैद का मतलब तो 14 साल होता है जो सरफराज ने कब की पूरी कर ली।
उम्रकैद को लेकर अक्सर फिल्मी दुनिया के तहत लोगों के जेहन में आता है 14 साल की सजा फिर आजादी, जबकि यह मात्र मिथक बन चुका है। असल जिंदगी में ऐसा नहीं है। उम्रकैद की सजा काटने वालों को 14 साल के बाद भी रिहाई मिले यह जरूरी नहीं बल्कि उन्हें ताउम्र सलाखों के उस पार ही जिंदगी बसर करनी होती है। यहां हम बात करेंगे राज्य के संशोधनागारों की जहां 2000 से अधिक ऐसे कैदी रह रहे हैं जिन्हें उम्रकैद की सजा मिली है और उन्होंने 14 साल की सजा पार कर आगे की सजा काट रहे हैं। इन कैदियों में महिलाएं भी शामिल हैं।
मंत्री ने कहा, अर्जी के बाद 572 कैदी हुए रिहा
इस बारे में राज्य के संशोधनागार मंत्री उज्ज्वल विश्वास ने सन्मार्ग को बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित स्टेट सेंटेंस रिव्यू कमेटी तय करती है कि अर्जी के आधार पर किसे रिहाई देनी है। अब तक कमेटी ने 572 ऐसे कैदियों को रिव्यू के बाद रिहा किया है। यह प्र​क्रिया लगातार चलती है जिसे विभिन्न चरणों से होकर गुजरना होता है तभी तय होता है​ कि कैदी ताउम्र जेल में ही रहेगा या उसे आजादी मिलेगी।
इन तीन बातों पर मिलती है रिहाई
* पुलिस की रिकॉर्ड में कैदी का उल्लेख किस श्रेणी में रखा गया है
* कैदी का व्यवहार जेल में कैसा रहा है
* पीड़ित और उसके घरवाले मानसिक रूप से कैदी को माफ करते हैं कि नहीं, अगर वो शिकायत करते हैं तो रिहाई का मामला अटक सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया ताउम्र जेल में रहना है उम्रकैद
संविधान में कहीं यह नहीं लिखा है कि उम्रकैद का मतलब 14 साल की कैद है। कोर्ट अपराधी के गुनाह के आधार पर उसे सजा सुनाता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में अपने निर्णय से यह स्पष्ट किया है कि आजीवन कारावास या उम्रकैद का अर्थ है जीवनभर के लिए जेल फिर भी आमजनों में उम्रकैद को लेकर काफी कन्फ्यूजन है जबकि हकीकत है कि उम्रकैद का मतलब जिंदगी भर जेल में रहना है, इसे 14 साल नहीं माना जा सकता।
कोर्ट उम्रकैद की सजा देता है, एक्जिक्यूट राज्य सरकार के हाथ में है
कोर्ट किसी मुजरिम को उम्रकैद की सजा सुनाता है परन्तु उसको एक्जिक्यूट करने का काम राज्य सरकार के हाथ में होता है, जो अधिकार राज्य को संविधान की सीआरपीसी की धारा 433-ए के तहत मिला होता है। राज्य में तृणमूल की सरकार आने के बाद ही 6 सदस्यों की स्टेट सेंटेंस रिव्यू कमेटी गठित की गयी, जिसकी सलाना तीन बैठकें होती हैं। यहां इस कमेटी को अधिकार दिया गया है उम्रकैद की सजा काट रहा अपराधी 14 साल से पहले रिहा न हो।

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