चुनावी युद्ध में शब्दों के जहरीले तीर से लहुलूहान हो रहे हैं नेता

कोलकाता : विधानसभा चुनाव जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में उबाल बढ़ता जा रहा है। हालांकि कहा जा रहा है कि इस बार पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव पिछले चुनावों से काफी अलग होने वाला है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी चुनाव की घोषणा भी नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक संघर्ष की घटनाएं जरूर शुरू हो गयी हैं। हालांकि ना केवल राजनीतिक संघर्ष बल्कि इस चुनावी युद्ध में शब्दों के जहरीले तीर से भी नेता लहुलूहान हो रहे हैं। इसमें तृणमूल या भाजपा कोई भी पीछे नहीं है। दोनों ओर से जमकर ऐसे शब्दों का उल्लेख किया जा रहा है या फिर ऐसे बयान दिये जा रहे हैं, जो पहले कभी पश्चिम बंगाल की राजनीति में नहीं देखने को मिला था।
दूध मांगोगे खीर देंगे, बंगाल मांगोगे…
तृणमूल नेता मदन मित्रा अक्सर अपने बयानों के कारण सुर्खियों में रहते हैं। हाल में मदन मित्रा ने कहा था, ‘दूध मांगोगे खीर देंगे, बंगाल मांगोगे तो चीर देंगे।’ उनके इस बयान को लेकर काफी हंगामा मचा था। भाजपा की ओर से इस बयान की काफी आलोचना भी की गयी थी।
शारीरिक बनावट पर भी साधा गया निशाना
पश्चिम बंगाल की राजनीति में व्यक्तिगत हमले और शारीरिक बनावट को लेकर हमले ना के बराबर ही देखने को मिलते थे, लेकिन इस बार के चुनाव में यह सब अभी से ही देखने को मिल रहा है। ‘नादूस, नुदुस, फानूस, फाटूस फुटुह चेहरा।’ गत गुरुवार को द​क्षिण 24 परगना की सभा से मुख्यमंत्री ने कुछ इसी तरह गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा था।
दिलीप घोष ने की थी नियंत्रण में रहने की बात
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के बयान अक्सर ही सुर्खियां बटोरते रहते हैं। हाल में मां दुर्गा को लेकर उन्होंने विवादित बयान दिया था और कहा था कि मां दुर्गा के पूर्वजों के बारे में कोई नहीं जानता। इससे पहले भी दिलीप घोष के बयान को लेकर विवाद हुआ था जिसमें उन्होंने एक तरह से धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि चुनाव बाद अपने बच्चों का मुंह देखना चाहते हैं तो उन्हें संयम में रहने के लिए कहें।
चलकर बूथ जाएंगे, लेकिन खाट में लौटेंगे
प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष राजू बनर्जी भी भाजपा के उन नेताओं में हैं जो अपने विवादित बयानों के कारण हमेशा चर्चा में रहते हैं। गत मंगलवार को दुर्गापुर में भाजपा की सभा में उन्होंने कहा, ‘तृणमूल के नेता पैदल चलकर बूथ तक आयेंगे, गुण्डागर्दी करेंगे और वोट लूटेंगे। इस बार ऐसा नहीं होगा। बूथ तक तो पैदल चलकर आ जाएंगे, लेकिन वापस लौटेंगे खाट में।’
खेला होबे, लेकिन माल – मसाला देंगे मदन
‘खेला होबे।’ बोलपुर की जमीन से निकला यह नारा आज तृणमूल और भाजपा, दोनों ही पार्टियों की जुबां पर है। हालांकि तृणमूल नेता मदन मित्रा इससे एक कदम आगे बढ़ गये हैं। उन्होंने कहा है, ‘खेला होबे, लेकिन माल-मसाला रात में मैं दूंगा।’ अब यह बयान भी काफी चर्चा में आ गया है।
खेला होबे रात 9 बजे के बाद
तृणमूल के बीरभूम जिलाध्यक्ष अनुव्रत मण्डल ने ही खेला होबे का नारा दिया था। बुधवार को उन्होंने एक और बात कही। अनुव्रत मण्डल ने कहा कि खेला होबे, लेकिन रात 9 बजे के बाद। इस दौरान अनुव्रत मण्डल क्रिकेट पर हाथ आजमा रहे थे। हालांकि उनके इस बयान का क्या मतलब निकाला जाए, यह समझाने के लिए इशारा ही काफी है।

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