कोलकाताः डॉक्टरों की कमी की मार पड़ने लगी है मरीजों पर

घण्टों करना पड़ रहा है इंतजार
सीएनएमसीएच में 200 तो एनआरएस में 198 डॉक्टर व नर्स हैं संक्रमित
मधु सिंह
कोलकाता : कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से सबको अपने चपेटे में ले रहा है। अस्पतालों के डॉक्टर भी इससे नहीं बच पा रहे हैं और तेजी से ये संक्रमण डॉक्टरों में फैलता जा रहा है। अगर डॉक्टर ही संक्रमित हो गये तो फिर मरीजों का इलाज कैसे हो ? अब तक विभिन्न सरकारी अस्पतालों के सैकड़ों डॉक्टरों में ये संक्रमण फैल चुका है। ऐसे में डॉक्टरों की कमी की मार अभी से मरीजों पर पड़ने लगी है। इला​ज चालू कराने के लिए भी मरीजों के परिजनों को घण्टों इंतजार करना पड़ रहा है। दूर-दराज से आये लोगों को इस कारण मुश्किल हो रही है। मरीजों को हो रही परेशानियां जानने सन्मार्ग पहुंचा विभिन्न अस्पतालों में।
रैट व आरटीपीसीआर की रिपोर्ट 2 दिनों से नहीं मिली
कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज व अस्पताल (सीएनएमसी) में गत 13 दिसम्बर को बाटानगर से आये मिंटू कुमार रॉय को सीने में दर्द की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था। मिंटू के भाई समीर राॅय का आरोप है कि जबसे उन्हें भर्ती कराया गया है, उसी समय से सही ढंग से इलाज नहीं हो रहा है। गत 4 जनवरी को उन्हें आईटीयू में भेज दिया गया, आईटीयू के लोग मरीजों के साथ सलूक अच्छा नहीं करते हैं। डॉक्टरों की कमी तो अब हुई है, लेकिन काफी पहले से ही ऐसा हो रहा है। आरटीपीसीआर व रैट टेस्ट गत 4 जनवरी को हमने कराया था ताकि रिपोर्ट मिलने के बाद उन्हें दूसरे अस्पताल में ले जा सके। हालांकि अब तक रिपोर्ट भी नहीं मिली है जिस कारण काफी परेशानी हो रही है। केवल एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग में हमें घूमाया जा रहा है। कई तरह के टेस्ट भी बाहर से करने के लिए कहे जा रहे हैं, डॉक्टरों की यहां काफी कमी है। केवल कुछ जूनियर डॉक्टर हैं और उनका भी व्यवहार ठीक नहीं है। यह हाल केवल पिंटू का नहीं है बल्कि इस तरह के कई और मरीज हैं।
घण्टों इंतजार के बाद चालू हुआ इलाज
ऐसी ही स्थिति में है एनआरएस अस्पताल जहां इलाज चालू करवाने के लिए घण्टों का इंतजार करना पड़ रहा है। हाबरा के रहने वाले लोग अपने मरीज नरेंद्र नाथ पॉल (84) को लेकर बारासात अस्पताल गये थे। उन्हें स्ट्रोक आया था, ऐसे में वहां से उन्हें एनआरएस अस्पताल में भेज दिया गया। यहां दोपहर 1 बजे तक हमलोग पहुंच गये थे। इसके बाद इलाज चालू करवाने के लिए हमें शाम तक इंतजार करना पड़ा। पहले हमें 6 तल्ले में जाने के लिए कहा गया, इसके बाद दूसरा तल्ला, फिर चौथे तल्ले में भेजा गया। यहां तक कि इमरजेंसी के लिए टिकट लेने के लिए भी घण्टों इंतजार करना पड़ा। एक तरह से हमें घण्टों परेशान किया गया। अंदर लोग कह रहे हैं कि डॉक्टर कम हैं जिस कारण परेशानी हो रही है। शाम लगभग 5 बजे से उनका इलाज चालू किया गया।
अस्पतालों की तस्वीर बदली, मरीजों की भर्ती कम
इधर, कोरोना के बढ़ते ही सरकारी अस्पतालों की तस्वीर बदल गयी है। जो सरकारी अस्पताल मरीजों के परिजनों की खचाखच भीड़ से भरे रहते थे, वहां अब परिजनों की संख्या काफी कम हो गयी है। अस्पतालों में भर्ती भी कम की गयी है और इमरजेंसी मरीजों को ही भर्ती लिया जा रहा है। इस दिन ओपीडी के सामने भी काफी कम भीड़ नजर आयी। मरीज के परिजन भी कम संख्या में आ रहे हैं, इमरजेंसी होने पर ही परिजन अस्पताल में आ रहे हैं।

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