महानगरः पूजा के सिर्फ 100 दिन बाकी लेकिन…

कोलकाताः कोरोना का काला साया सूबे के प्रमुख त्योहार यानी दुर्गोत्सव को प्रभावित कर रहा है। हालांकि दुर्गोत्सव में अभी तीन महीने से भी अधिक समय शेष है, लेकिन मूर्ति निर्माण का समय निकल गया है और दिन-प्रतिदिन निकलता जा रहा है। इस वजह से उत्तर कोलकाता स्थित मूर्तिकारों के मठ कहे जाने वाले कुम्हारटोली के करीबन 450 मूर्तिकारों को रोजी-रोटी की चिंता सताने लगी है। मूर्तिकारों के संगठन कुम्हारटोली मृतशिल्प संस्कृति समिति का कहना है कि आश्विन शुक्ल पक्ष (सितंबर-अक्तूबर) में होने वाले कहीं नौ और कहीं पांच दिवसीय दुर्गोत्सव के लिए हर साल प्रतिमा निर्माण का आर्डर होली (मार्च) के दिन से मिलने शुरू हो जाते है। यहां बनने वाली 4000 मूर्तियों में से 5 फीसदी का आर्डर और अग्रिम भुगतान होली पर मिल जाता है।
इसके बाद बांग्ला नववर्ष (पोइला बैशाख, 14 अप्रैल), अक्षय तृतीया और रथयात्रा तक यहां लगभग सभी मूर्तिकारों को पर्याप्त काम यानी आर्डर और अग्रिम पैसा मिल जाता था और सावन (जुलाई) से ये मूर्तिकार युद्धस्तर पर मूर्ति गढ़ने जुट जाते थे, लेकिन इस साल कोरोना महामारी की वजह से स्थिति बिल्कुल विपरीत है।
क्या कहा मूर्तिकार ने?
कुम्हारटोली की महिला मूर्तिकार चाइना पाल ने बताया कि एक वर्ष पहले तक वे जुलाई में अपने गोला (मूर्ति निर्माण की जगह) पर नो आर्डर की तख्ती लगाकार तन्मयता से एक चाल (एक साथ पांचों मूर्ति) की प्रतिमा बनाने में जुट जाती थीं, लेकिन इस बार अभी तक आर्डर का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना को लेकर मौजूदा वक्त में जो स्थिति है और आगामी 2-3 महीने को लेकर जो आशंका जताई जा रही है, उसे देखते हुए बगैर आर्डर के मूर्ति गढ़ने की वे हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
मूर्तिकार समीर मल्लिक ने बताया कि ऐसी विकट स्थिति उन जैसे मूर्तिकारों ने इससे पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कहा दुर्गोत्सव तो अवश्य मनाया जाएगा, लेकिन बेहद सूक्ष्म रुप में, क्योंकि आयोजकों का बजट कम है, प्रायोजकों का अभाव है, सरकारी दिशा-निर्देश हैं और लोगों में कोरोना को लेकर भय है।

 

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