जस्टिस गंगोपाध्याय का झन्नाटेदार तमाचा सीबीआई को

कल्याण ने कहा : हम तो हो गए हैं ‘बहिरागत’
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एक मामले की सुनवायी के दौरान बातचीत का सिलसिला कुछ यूं चला कि जाने अनजाने जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने सीबीआई को एक झन्नाटेदार तमाचा जड़ दिया। इस बातचीत में हिस्सा ले रहे सामने खड़े सांसद व एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने तो सीबीआई की जन्मकुंडली ही बना कर रख दिया। जस्टिस गंगोपाध्याय का सवाल था कि प्राइमरी टीचरों के मामले की जांच सीबीआई को सौंप कर गलती तो नहीं कर दी है।
जस्टिस गंगोपाध्याय और एडवोकेट बनर्जी के बीच शुरू हुई बातचीत का सिलसिला बेहद अनौपचारिक हो गया। उन्होंने कहा कि हताश नहीं हूं पर बेहद थक गया हूं। एडवोकेट बनर्जी की तरफ मुखातिब होते हुए कहते हैं कि स्कूलों में अवैध नियुक्ति का पहला मामला सीबीआई को नवंबर में सौंपा था और आज जांच किस मुकाम पर है। फिर थके हुए स्वर में कहते हैं शायद सिट (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) को सौंपना बेहतर हुआ होता। एडवोकेट बनर्जी कहते हैं कि सीबीआई के पास काम ज्यादा है, मैनपावर नहीं है, यही वजह है कि उनके मामलों में सजा का औसत सात प्रतिशत से घट कर एक पर आ गया है। जस्टिस गंगोपाध्याय कहते हैं कि उन्हें सुरंग के उस पार कोई रोशनी नहीं दिख रही है। फिर कोलकाता के पुलिस अफसरों की तारीफ करते हुए कहते हैं वे बेहद प्रतिभाशाली हैं। फिर कहते हैं बेहद थक गया हूं। कल रात बेहद तनाव में था, इसमें कोई शक नहीं कि स्कूल सर्विस कमिशन के मामल में बहुत ही गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। कल्याण बनर्जी कहते हैं : कल ही तो आपने एक आदेश दिया था। जस्टिस बनर्जी कहते हैं : ‘वह एक बेहद महत्वपूर्ण मामला था, मेरी पार्थ चटर्जी से कोई रंजिश नहीं है वे एक विद्वान व्यक्ति है, मैं ने भरी अदालत में अपने मन की बात कही है, हो सकता है जज्बात में कुछ कह गया हूं, अगर मेरे सुझाव एक मुकाम तक पहुंचे होते तो शायद समस्या सुलझ गई होती।’ फिर कहते हैं : मुझे शक है, शायद ही सीबीआई इन मामलों का खुलासा कर पाए। इसके बाद ही एडवोकेट कल्याण बनर्जी सीबीआई का पोस्टमार्टम करते हुए कहते हैं : सीबीआई कौन सी जांच पूरी कर पायी है, गरबेटा, भिखारी पासवान, रिजवानुल, कितने गिनाएं। सीबीआई के ट्रायल का यह आलम है कि तापसी मल्लिक के मामले में हाई कोर्ट ने सभी को बरी कर दिया। जस्टिस गंगोपाध्याय कहते हैं : ‘इस तरह के मामले आते हैं तो मैं क्या करूं, मेरा अंतिम सवाल है युवाओं को रोजगार मिले, सही युवाओं को रोजगार मिले।’ एडवोकेट कल्याण बनर्जी कहते हैं : ‘मेरा ताल्लुक सिर्फ पार्थो से है, 2011 से पहले मैं एक अलग मुकाम पर था, जस्टिस गंगोपाध्याय सवाल करते हैं : तो क्या अब आप बहिरागत हो गए हैं, कल्याण मुस्कराते हुए हामी भरते हैं’। और बातचीत का सिलसिला यहीं थम जाता है।

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