धर्म बदलकर जिहाद की नींव रख रहे हैं जेएमबी आतंकी

  • पहचान बदलकर हिंदू लड़कियों से शादी कर रहे हैं बांग्लादेशी आतंकी
  • राज्य के बेरोजगार युवाओं को आतंकी संगठन का सदस्य बना रहा है जेएमबी
  • जांच एजेंसियों से बचने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं आतंकी संगठन

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बीते कुछ सालों में भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात मुजाहिद्दीन बांग्लादेश की ओर से नई तरकीब अपनाए जा रहे हैं। खासतौर पर बांग्लादेश से भारत में आने वाले आतंकी इन दिनों धर्म बदलकर भारत में ‌छिपकर रहते हैं। इसके बाद भारतीय हिंदू लड़की से शादी कर अपने आतंकी गतिविधि को अंजाम देने लगते हैं। कुछ साल पहले बांग्लादेश में पकड़ी गयी महिला जेएमबी आतंकी प्रज्ञा देवनाथ उर्फ आयशा जन्नत इसका पहला उदाहरण थी। अब हरिदेवपुर से पकड़े गए तीन जेएमबी आतंकियों ने इस पर मुहर लगा दी है। जानकारी के अनुसार हुगली के धनियाखली की रहने वाली प्रज्ञा देबनाथ वर्ष 2009 में अपने घर से लापता हो गई थी। 10 साल बाद वर्ष 2019 में उसे बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस यह जानकर हैरान रह गई कि वह अब प्रज्ञा देबनाथ नहीं रही, बल्कि उसका नया नाम आयशा जन्नत मोहोना हो गया था। वह जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) की वीमेंन सेल की सक्रिय सदस्य थी।
इंटेलिजेंस को चकमा देने के लिए धर्म का इस्तेमाल
ऐसे कई और उदाहरण हैं जहां आतंक‌ियों ने धर्म का इस्तेमाल जांच एजेंसियों से बचने के लिए एक शिल्ड के तौर पर किया है। कोलकाता पुलिस के एसटीएफ सूत्रों की मानें तो आतंकी समूहों के लिए धर्म अब वर्जित नहीं है, बल्कि वे इसे अपनी पहचान छिपाने के लिए एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। धर्म बदलना अब इन आकाओं के लिए कोई महत्वपूर्ण बात नहीं है, बल्कि वे इंटेलिजेंस को चकमा देने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं।
हिंदू महिलाओं से शादी कर अभियान को बढ़ाया आगे
कोलकाता पुलिस के एसटीएफ अधिकारियों ने कुछ दिनों पहले हरिदेवपुर के रिहायसी इलाके से नजीउर रहमान पावेल, मेकैल खान और रबीउल इस्लाम नामक तीन जेएमबी आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये तीनों भारत में घुस आए थे और शहर में हिंदू के नाम रह रहे थे। पहचान से बचने के लिए पावेल ने हिंदू नाम जयराम बेपारी का इस्तेमाल किया। सूत्रों के अनुसार नजीऊर और मेकैल खान उर्फ शेख शब्बीर ने कोलकाता में दो हिंदू महिलाओं से दोस्ती की और अगले महीने शादी करने की योजना बनाई। इससे उन्हें संदेह पैदा किए बिना अन्य लोगों को अभियान में भर्ती करने में मदद मिली।
इन आतंकवादियों के लिए शादी एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावी साधन है। यह न केवल उन्हें आसानी से भारतीय पहचान प्राप्त करने में मदद करता, बल्कि साथ ही एक स्थायी पहचान दिलाता है जो एक प्रभावी सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है।
लॉकडाउन और बेरोजगारी ने काम बनाया आसान
कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन और उसके बाद की बेरोजगारी ने इन आतंकी समूहों के काम को आसान बना दिया है। बांग्लादेश से लगी सीमा और बेरोजगारी का फायदा उठाकर जेएमबी, अंसारुल्लाह गुट और यहां तक कि आईएस जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी गुट राज्य में अपना जाल फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। कभी सीधी बातचीत के जरिए तो कभी ऑनलाइन के जरिए जेएमबी आतंकी राज्य के बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे हैं।

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