स्मार्ट हो चुके कोरोना का ईजी टार्गेट बन रहे मासूम

बच्चों में ज्यादा पड़ रही है इस महामारी की मार
शारीरिक से ज्यादा मानसिक रूप से वार करना रहा वायरस
100 में 4 कोरोना संक्रमितों में बच्चे शामिल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : 2020 की तस्वीर बिगाड़ने के बाद कोरोना गया नहीं बल्कि नये रूप में वापस आया गया है। अपने दूसरे वेब में कोरोना पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गया है। उसका टार्गेट भी अब पहले जैसा नहीं है। इस सदी के सबसे बड़े महामारी की मार इस बार मासूमों पर पड़ रही है जिनकी उम्र महज महीने से शुरू होकर 16 साल के बीच है। बच्चों का बीमार पड़ना कोई नयी बात नहीं होती लेकिन उनकी तबीयत हल्की होते ही परेशानी में पड़ जाते है माता-पिता जिनकी चिंता इस बार अधिक बढ़ी हुई है।
3 तरीकों से बच्चों पर अटैक कर रहा है कोरोना
चाइल्ड स्पेशलिस्ट व एचओडी (मेडिका सुपरस्पेशीऐलिटी अस्पताल) डॉ. अशोक मित्तल ने बताया कि कोविड 19 बच्चों को तीन तरीकों से अपनी कैद में ले रहा है। इसमें पहला कारण मामूली है दूसरे में थोड़ी सावधानी की जरूरत है लेकिन तीसरे कारण में अगर लापरवाही हुई तो मामला बिगड़ सकता है।
* पहले कारण में वह मामले है जहां नवजात को कोविड अपना निशाना बनाते है। ये बच्चे होते है जिन्हें कोविड पॉजिटिव महिला जन्म देती है। इन बच्चों को एहतियातन 12-24 घंटे के लिए आईशोलेट कर टेस्ट किया जाता है। इन मामलों में आईटीपीसीआर निगेटिव होती है इसलिए थोड़ा सतर्क होना होता है।
* दूसरे कारण में वह बच्चे होते है जिन्हें कोरोना का वायरस अपने परिवार से मिलता है।
* तीसरा और सबसे गंभीर वह मामले है जहां बच्चों को वायरस अपने घरवालों से मिलता है। इस मामले में घरवाले का कोरोना ठीक होने के करीब 15-30 दिन के बाद बच्चों में वायरस का असर दिखने लगता है। इस अवस्था में बच्चे में तेज बुखार होता है जो 5 दिनों तक रहता है। जीभ और आंख लाल हो जाते है। दिल की धड़कन कम हो जाती है और बच्चे को वेंटिलेटर पर ले जाने की नौबत आ जाती है।
ये है बच्चों के लक्षण
शरीर पर लाल दाने, ब्लड प्रेशन ड्रॉप होना, पेट और सीने में पानी जम जाना। इसके अलावा डायरिया, बुखार, हल्की खासी सामान्य बात है।
दिमाकी स्तर पर वार कर रहा है कोरोना
मनोचिकित्सक देवाशिष रॉय की माने तो बच्चे हो या बड़े कोरोना सबसे पहले दिमाकी रूप से अपना वार करता है। यह वह अवस्था है जहां थोड़ी सी चूक आपको डिप्रेशन की ओर धकेल सकती है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि कोरोना से प्रभावित छोटे-बड़े हर शख्स से बात की जाए ताकि मानसिक रूप से परेशान न हो सके। कोरोना के कारण बच्चों में कुछ बदलाव आते है जैसे गुमसुम बैठना, अचानक रोने लगना, कुछ भी खाने की जिद करना, गुस्सा आना। ऐसे लक्षण अगर दिखते है तो मां और पिता दोनों को एक साथ ठंडे दिमाक से बच्चों को हैंडल करने की जरूरत है क्योंकि कोरोना ऐसा वायरस है जो बच्चों को उनकी सोशल लाइफ से अलग करता है और उनका चंचल दिमाक इस बात को बर्दाश्त नहीं कर पाता। इसमें आपनी चूक आपके बच्चे को आपसे कब दूर कर देगी पता ही नहीं चलेगा क्योंकि तब तक कोरोना का जानलेवा वायरस उसे अपनी आगोश में ले चुका होगा।

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