पीटी में अधिक नंबर दे कर टीचरों की अवैध नियुक्ति

हाई कोर्ट ने नाम व नंबर सहित मांगा पूरा ब्योरा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पर्सनलिटी टेस्ट (पीटी) में अधिक नंबर दे कर अवैध रूप से टीचरों की नियुक्ति की जाने का आरोप लगा है। हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने पीटी के लिए बुलाए गए आवेदकों के नाम और नंबर सहित पूरा ब्योरा दिए जाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जस्टिस गंगोपाध्याय ने आदेश दिया है कि एसएससी के डाटा रूम पर लगी सील फिलहाल नहीं खुलेगी।
एडवोकेट फिरदौश शमीम ने यह जानकारी देते हुए बताया कि लिखित परीक्षा आदि के बाद आवेदकों को पर्सनलिटी टेस्ट के लिए बुलाया जाता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए नियम है कि जितनी रिक्तियां हैं उनके अनुपात में 1.1/4 फीसदी अधिक लोगों को बुलाया जाएगा। एडवोकेट शमीम ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने एक स्टैटिस्टिकल एनालाइसिस किया है और उन्होंने इसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। एक मिसाल के तौर पर वर्नाक्यूलर में कुल 219 रिक्तियां थी और इस अनुपात के हिसाब से पीटी के लिए 307 आवेदकों को बुलाया जाना था, पर 355 लोग बुलाए गए थें। इस तरह 48 आवेदक अधिक बुलाए गए थें। जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि यह एक बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जानी चाहिए। इसके साथ ही चेतावनी दी कि इस तरह तो पूरी नियुक्ति प्रक्रिया ही रद्द की जा सकती है। जस्टिस गंगोपाध्याय ने आदेश दिया कि सभी विषयों में पीटी के लिए बुलाए गए आवेदकों के नाम और उन्हें दिए गए नंबरों का ब्योरा 16 अगस्त तक दाखिल किया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने एसएससी को आदेश दिया था कि ब्रेक अप नंबरों के साथ नये सिरे से एप्लिकेशन डाटा प्रकाशित किया जाए। एडवोकेट शमीम ने बताया कि इसमें भी हेराफेरी की गई है। इस सिलसिले में उन्होंने विश्वजीत विश्वास की मिसाल दी। एसएससी की तरफ से 2018 में दायर एफिडेविट के मुताबिक पीटी में उसे 8 नंबर मिले थे। दूसरी तरफ इस डाटा के मुताबिक उसे 7.5 मिले थे। इसके साथ ही जस्टिस गंगोपाध्याय ने आदेश दिया कि एप्लिकेशन डाटा का प्रकाशन नये सिरे से किया जाए। इसमें आवेदक सिर्फ अपना नंबर ही देख सकते हैं और उसी विषय में दूसरे को कितना नंबर मिला था इसकी जानकारी हासिल नहीं कर सकते हैं। ज‌स्टिस गंगोपाध्याय ने सवाल किया कि इस तरह आवेदक को यह जानकारी कैसे मिलेगी कि इसी विषय में दूसरे को कितने नंबर मिले थे। इसके बाद ही वह तुलनात्मक अध्ययन कर सकता है और इससे पारदर्शिता भी आएगी।

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