अगर आपके वार्ड से लीड नहीं मिली तो तृणमूल कर सकती है कार्रवाई !

बेहतर प्रदर्शन करने वाले को 1 करोड़ का फंड देने की बात पहले ही कही गयी थी
निगम चुनाव में टिकट बंटने या कटने में पड़ सकता है इसका असर
कई वार्डों में पार्षदों के बीच खटास के कारण पार्टी ने उठाया यह कदम
सन्मार्ग संवाददाता
काेलकाता : ऐसा पहली बार नहीं है। चुनाव सांसद का हो या विधायक का, उनकी जीत या हार की जिम्मेदारी पार्षदों को मिलती ही आयी है। इस बार भी तृणमूल ने बंगाल की सत्ता के महासंग्राम में पार्षदों को अपने उम्मीदवार को जिताने की जिम्मेदारी दी है। इस बाबत चुनाव से पहले ही कोलकाता के समस्त संगठन को लेकर तृणमूल भवन में बैठक की गयी थी जिसमें साफ बता दिया गया था कि इस बार के चुनाव में पार्षदों की भूमिका क्या होनी चाहिए। विधानसभा चुनाव अपने अंतिम चरण में है जबकि करीब डेढ़ महीनों के भीतर निगम चुनाव आने वाले हैं। इसलिए पार्षदों की ​जिम्मेदारी कितनी पूरी हुई है इस पर पार्टी रिपोर्ट कार्ड बनाने में जुटने ही वाली है। इस दिशा में अगर पार्षद के वार्ड से लीड नहीं मिलती है तो उसके खिलाफ तृणमूल कांग्रेस बड़ी कार्रवाई कर सकती है।
पार्षदों का दावा, कोशिश जारी है, बाकी जनता पर
वार्ड नंबर 41 की कोऑर्डिनेटर रीता चौधरी कहती हैं कि मैं वामामोर्चा से तृणमूल में आयी हूं। मेरी कोशिश है कि अपने वार्ड में लीड दे सकूं। उम्मीद है मेरे अपने कुछ वोटर हैं वह मेरे साथ होंगे। बाकी जनता की मर्जी जो वह चाहेगी वही होगा। वार्ड नंबर 27 की कोऑर्डिनेटर मीनाक्षी गुप्ता को अपने विकासकार्य पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि मेरा काम देखकर जनता वोट देगी और मुझे यकीन है कि जनता मुझे निराश नहीं करेगी, उसका फल विधायक को भी मिलेगा। वार्ड 38 के वार्ड प्रेसिडेंट बुलबुल साव कहते हैं कि लोकसभा में जो रिजल्ट खराब हुआ था वह विधानसभा में ठीक करना है। दीदी हमारी उम्मीद हैं, कोशिश हमारी जारी है। समीर देवनाथ वार्ड 25 के प्रेसिडेंट हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य दिया गया है तो उसे पूरा भी करना है। सिर्फ कहने भर से नहीं, देखने वाली बात है कि कौन इसे शिद्दत से पूरा कर रहा है।

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