बिल स्वीकार करने योग्य रहा तो स्वीकार करूंगा : राज्यपाल

कोलकाता : राज्य के विश्वविद्यालयों में आचार्य पद से राज्यपाल को हटाने को लेकर राज्य सरकार ने कई बिल लाये हैं। अब आचार्य पद पर राज्यपाल के स्थान पर मुख्यमंत्री रहेंगी। मंगलवार को इन बिलों को लेकर पहली बार राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने प्रतिक्रिया दी। राजभवन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, ‘मुद्दा बदलने की कोशिश की जा रही है। मैं बहुत ही अच्छे से बिल देखूंगा, पक्षपात नहीं करूंगा। स्वीकार करने योग्य होने पर स्वीकार करूंगा नहीं तो राज्य सरकार से इस पर बात करूंगा। लोकतंत्र की तिलांजलि नहीं दूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘कहा जा रहा है कि राज्यपाल को हटाना होगा।’ मंगलवार को भाजपा विधायकों को साथ लेकर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल पैगम्बर विवाद व अग्निपथ योजना के खिलाफ राज्य में अशांति को लेकर मुखर हुए तो वहीं आचार्य बिल के भविष्य को लेकर भी उन्होंने मुंह खोला। हिंसा लेकर राज्यपाल ने कहा, ‘किसी समस्या का समाधान हिंसा से नहीं हो सकता। लोकतंत्र में हिंसा का स्थान नहीं है।’ चुनाव बाद हिंसा को लेकर मुखर होते हुए राज्यपाल ने कहा, ‘हमारे राज्य में चुनाव के बाद हिंसा होती है, सरकार कोई कदम नहीं उठाती। सरकारी संपत्ति कैसे नष्ट की जा सकती है ?’ नियुक्ति दुर्नीति पर उन्होंने कहा, ‘लाखों लोगों की नौकरियों से खिलवाड़ किया जा रहा है। उच्च स्तर तक दुर्नीति है।’ शिक्षा नीति पर उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्वीकार नहीं करने का मतलब है शिक्षा का भविष्य नष्ट करना। मैं सरकार का दोस्त होना चाहता हूं, लेकिन एक ही शर्त है, लोकतंत्र की राह पर चलना होगा। कानून से ऊपर कोई नहीं है, मैं या मुख्यमंत्री भी नहीं हैं।’

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