मैंने सुना है वो बॉस के करीब है तो बड़ी पोस्ट पर तो आना ही था’, कामकाजी महिलाओं पर मर्दों के कॉमेंट

कोलकाता : आज के जमाने में ज्यादा से ज्यादा महिलाएं करियर को तव्ज्जों देती दिखाई दे रही हैं। अच्छी एजुकेशन के दम पर मिली इस ताकत को वे खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। भारत और दुनिया की कई नामी कंपनियों की कमान महिलाओं के हाथों में है। हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि फीमेल्स को लेकर नकारात्मक सोच पूरी तरह से बदल गई है। आज भी ऑफिस में ऐसे कई पुरुष मौजूद हैं, जो अपनी महिला साथी को लेकर ऐसी-ऐसी बातें कह जाते हैं, जो उनकी मेहनत पर सवाल उठाने के साथ ही कैरेक्टर तक पर उंगलियां उठाती नजर आती हैं।
अरे मैंने सुना है वो बॉस के करीब है, तो बड़ी पोस्ट पर तो आना ही था
जो मर्द इस बात को पचा नहीं पाते कि महिलाएं भी ऑफिस में स्ट्रॉन्ग पोजिशन होल्ड कर सकती हैं, वे गॉसिप फैलाने में देर नहीं लगाते। अगर बड़े पैकेज या पोस्ट पर कोई महिला आ जाए या उसे प्रमोट कर दिया जाए, तो इसे सीधे बॉस से उसकी नजदीकी से जोड़ दिया जाता है। ये सब बातें कहते वक्त पुरुषों को ये एहसास तक नहीं होता कि वे असल में एक महिला के कैरेक्टर पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
ये तो मैटरनिटी लीव पर चली जाएंगी
प्रेग्नेंसी के दौरान और बच्चे को जन्म देने के बाद महिलाओं के शरीर में इतनी उथल-पुथल मचती है, जिसके बारे में पुरुष अंदाजा तक नहीं लगा सकते हैं। वे इस बारे में चाहे कितनी ही किताबें पढ़ लें या फिर विडियोज देख लें, लेकिन जिसके शरीर में ये सब हो रहा होता है वही असलियत में समझ सकती है कि उसके लिए मां बनने का एक्सपीरियंस क्या-क्या साथ लेकर आता है? तो अगली बार आप महिला की मैटरनिटी लीव पर सवाल उठाएं, उससे पहले थोड़ा सोच लें।
ये आजकल की मॉर्डन महिलाओं के चोचले हैं
‘अरे ये आजकल की महिलाओं के चोचले हैं, पहले क्या महिलाएं बच्चे को जन्म नहीं देती थीं? वो तो खेत में काम करने भी जाती थीं। संयुक्त परिवार को संभालती थीं।’ जी हां, इस तरह की बातें ऑफिस में भी की जाती हैं। उन्हें पुराने जमाने की महिलाओं के साथ ऐसे कंपेयर किया जाता है, जैसे वो कोई वस्तु हों। अगर पुराने जमाने में कोई महिला अकेले संयुक्त परिवार के लिए खाना बनाती थी और आज कोई फीमेल ऐसा न करना चाहे, तो ये उनका फैसला है कि वे अपने घर और ऑफिस को कैसे मैनेज करना चाहती हैं।
हम जानते हैं सब ऐसे नहीं हैं
हम जानते हैं कि सभी पुरुष ऐसे नहीं हैं। ऐसे कई मेल्स हैं, जो अपनी महिला साथी को बराबरी का दर्जा और सम्मान देते हैं। ये वे किसी हमदर्दी के कारण नहीं, बल्कि उनकी काबिलियत को देखकर करते हैं। हालांकि, ये भी सच है कि इनका प्रतिशत उन पुरुषों के मुकाबले कम है, जो सफल कामकाजी महिला को जज करने का मौका नहीं छोड़ते हैं। जरूरत है तो इस तरह की सोच को दूर करने की, ताकि महिला के काम को वो सम्मान मिल सके, जिसकी वे हकदार हैं।

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