डीए भुगतान में सरकारी खजाने से खर्च होगी बड़ी रकम

हजारों करोड़ का वित्तीर भार बढ़ सकता है, जल्द होगी बैठक
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : डीए मामले पर कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले है। लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों की मांग शुक्रवार को पूरी हो गयी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार से कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 10 लाख सरकारी कर्मचारियों को तीन महीने में उनका महंगाई भत्ता (डीए) मिल जाना चाहिए। हाईकोर्ट के इस आदेश से कर्मचारियों में खुशी है। इसके साथ ही राज्य सरकार पर लगभग हजारों करोड़ का वित्तीय भार बढ़ेगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य में डीए भुगतान के लिए सरकारी खजाने से बड़ी रकम खर्च होने जा रही है। असल में कितना वित्तीय भार बढ़ेगा, इस पर अभी भी हिसाब जारी है। नवान्न सूत्रों के मुताबिक इसी सप्ताह नवान्न में एक बैठक हो सकती है
कैसे बढ़ेगा बोझ
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को जिस दर पर डीए का भुगतान किया जाता है, राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी उसी दर पर डीए का भुगतान करना पड़ेगा। राज्य सरकार पर इसके लिए कितना अधिक वित्तीय बोझ बढ़ेगा, इसका सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अभी कहना मुश्किल है। वहीं सूत्र बताते हैं कि इससे लगभग हजारों करोड़ का वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
क्या कहना है कर्मचारियों के संघ का
काॅन्फेडरेशन ऑफ स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज के जनरल सेक्रेटरी मलय मुखर्जी ने कहा कि यह जीत सभी सरकारी कर्मचारियों की जीत है। अब सभी सरकारी कर्मचारी निदिष्ट स्तर पर डीए पायेंगे। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करती है तो हम शीर्ष अदालत में एक कैविएट भी दाखिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2009 से बकाया चल रहा है तो निश्चित रूप से सरकार का खर्च बढ़ेगा। राज्य को-ऑर्डिनेशन कमेटी के महासचिव विजय शंकर सिंह ने सन्मार्ग से खास बातचीत करते हुए कहा कि डीए पाना हमारा अधिकार है। 9 लाख से अधिक सरकारी कर्मचारियों को इससे लाभ होगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों का वामपंथी संगठन को-ऑर्डिनेशन कमेटी केन्द्र सरकार के कर्मचारियों जितना महंगाई भत्ता (डीए) देने की मांग लंबे समय से करता आया है।

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