हावड़ा दक्षिण में बंट सकता है वाम व हिन्दीभाषियाें का वोट

हावड़ा : हावड़ा में विधानसभा क्षेत्रों में इस बार तृणमूल व भाजपा के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। हावड़ा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में अभिनेत्री बनाम पत्रकार की टक्कर नजर आ रही है। हावड़ा के अंतर्गत आनेवाला दक्षिण हावड़ा विधानसभा क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। ऐसे में यहां तृणमूल व भाजपा के बीच कांटे की टक्कर नजर आ रही है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार भी मजबूत दावेदारी में शामिल हैं। दरअसल हावड़ा दक्षिण से तृणमूल ने पूर्व सांसद अंबिका बनर्जी की बेटी नंदिता चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है, वहीं इस बार भाजपा ने एक बार फिर लाेकसभा में चुनाव लड़ चुके रंतिदेव सेनगुप्ता पर ही अपना भरोसा जताया है। माकपा से सौमित्र अधिकारी व जेडीयू समर्थित निर्दलीय से अमित कुमार घाेष उर्फ श्रीकांत भी विधायकी की दौड़ में शामिल हैं। इस बार यहां के वोट किस ओर बंटेंगे, इसे लेकर जोर-शोर से चर्चाएं चल रही हैं। पेयजल, निकासी की समस्या से जूझ रहे अब हिन्दीभाषियों पर अटका है सारा वोट का समीकरण। जो लोग मोदी विरोधी हैं वे तृणमूल को अपना वोट देकर उसे सत्ता में रखना चाहते हैं। दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आतंकियों के खिलाफ एयरस्ट्राइक और उनके द्वारा किये जानेवाले विकास कुछ लोगों को भा रहे हैं। ऐसे में वाममोर्चा को जानेवाले वोट और हिन्दी भाषियों के वोट पर दोनों ही राजनैतिक पार्टियां दाव खेलना चाहती हैं। बात की जाये गत 2016 के विधानसभा चुनाव की तो हावड़ा की इस सीट पर तृणमूल का ही कब्जा रहा। शिक्षक ब्रजमोहन मजुमदार ने जीत हासिल की थी।
पार्टी के हर एक उम्मीदवार के साथ हुई थी समस्या
हालांकि इस बार पार्टी ने वृद्ध शिक्षक को मौका न देते हुए नया चेहरा लाया है। वहीं भाजपा द्वारा रंतिदेव को उम्मीदवार बनाने के बाद वे रोष में आ गये थे और चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पार्टी द्वारा मनाने पर वे चुनाव लड़ने को तैयार हो गये। वहीं जेडीयू उम्मीदवार अमित कुमार घोष की बात करें तो उन्होंने भी भाजपा ज्वाइन की थी लेकिन उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया तो वे जेडीयू से विधायक की दावेदारी के लिए खड़े हो गये।

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