भवानीपुर : हिन्दीभाषियों को भायेगी दीदी की ममता या भाजपा की तरफ होगा झुकाव

सत्ता में हैट्रिक हो गयी, अब भवानीपुर में तीसरी जीत की बारी
निर्णायक भूमिका में होगी यहां की आधी आबादी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : बंगाल की सत्ता में जीत की हैट्रिक बना चुकी ममता बनर्जी को अब अपनी होमसीट भवानीपुर में तीसरी जीत हासिल करनी है। नंदीग्राम में भाजपा के शुभेन्दु अधिकारी से हारने के बाद ममता अब भवानीपुर से उपचुनाव लड़ रही हैं। इसके पहले ममता इसी सीट से 2011 में उपचुनाव और 2016 में चुनाव लड़ चुकी हैं। 2011 में ममता बनर्जी को उस वक्त परिवर्तन की हवा के कारण रिकॉर्ड जीत मिली थी तो 2016 में कहीं न कहीं ममता का अपनी ही सीट पर जनाधार घटता दिखा था। इस बार यहां की स्थिति क्या होने वाली है इस पर सभी की नजर टिकी है, क्योंकि निर्णायक भूमिका में यहां की बड़ी आबादी का हिस्सा हिन्दीभाषी वोटर हैं जो करीब 60 फीसदी है।
जीत-हार का समीकरण बदलेंगे हिन्दू वोटर्स
भवानीपुर में करीब 60 प्रतिशत हिन्दू वोटर्स हैं जिनमें यहां गुजराती, मारवाड़ी, पंजाबी, यूपी और बिहार मूल के लोग शामिल हैं। ये वोटर्स यहां के जग्गू बाबू बाजार और अलीपुर जैसे इलाके में रहते हैं जो दशकों से यहां बसे हुए हैं। हालांकि इनका अपने जन्मस्थान से लगातार संपर्क कायम रहा है। हिन्दुओं के इस वोट का जितना महत्व तृणमूल के लिए है, उतना ही महत्वपूर्ण भाजपा के लिए भी माना जा रहा है।
भवानीपुर ने ही ममता को बनाया था अग्निकन्या
यह सीट ममता बनर्जी के लिए नयी नहीं है बल्कि उनकी गृह सीट है जहां की एक घटना ने ममता बनर्जी को देश के सियासी फलक पर पहली बार पहचान दिलायी थी। 90 के दशक में राजनीतिक हमले में इसी इलाके में ममता बनर्जी को इस कदर पीटा गया था कि ममता की जान पर बन आयी थी और वह अग्निकन्या के रूप में प्रसिद्ध हुईं।

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