अपर प्राइमरी टीचरों की नियुक्ति पर हाई कोर्ट का स्टे

जस्टिस भट्टाचार्या ने एजी से पूछा : निताई को 8 के बजाए 10 कैसे मिल गए
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जस्टिस सुब्रत तालुकदार और जस्टिस सौगत भट्टाचार्या के डिविजन बेंच ने अपर प्राइमरी टीचरों की नियुक्ति पर स्टे लगा दिया। डिविजन बेंच ने कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया जारी रहेगी पर कोर्ट की लीव के बगैर किसी को नियुक्ति पत्र नहीं दिया जा सकता है। इस मामले में सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील की गई थी। डिविजन बेंच ने मंगलवार को इसकी सुनवायी करने के बाद उपरोक्त आदेश दिया। अगली सुनवायी 12 सप्ताह बाद होगी और इस तरह नियुक्ति प्रक्रिया कम से कम तीन माह तक के लिए तो टल ही गई।
एडवोकेट बिक्रम बनर्जी और एडवोकेट फिरदौश शमीम ने बताया कि अपर प्राइमरी में टीचरों की नियुक्ति में पारदर्शिता नहीं होने और पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए हाई कोर्ट में रिट दायर की गई थी। जस्टिस अभिजीत गांगुली ने नियुक्तियों पर स्टे लगा दिया था। एसएससी की सफाई के बाद उन्होंने कुछ शर्तों के साथ नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ जस्टिस तालुकदार के डिविजन बेंच में अपील की गई थी। डिविजन बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि इंटरव्यू और पर्सनलिटी टेस्ट की प्रक्रिया जारी रहेगी। इसमें अभ्यार्थियों को एकेडेमिक, प्रोफेशनल, पर्सनलिटी टेस्ट और इंटरव्यू में मिले अंकों का कंप्यूटर के जरिए एक डाटा बेस तैयार करना पड़ेगा। इसमें प्राप्तांकों का ब्रेकअप भी होना चाहिए। इस डाटा बेस को उनके ऑरिजिनल कागजात के साथ डिविजन बेंच में अगली सुनवायी के दिन पेश करना पड़ेगा। पिटिशनरों की तरफ से एडवोकेट सुबीर सान्याल और एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्या ने बहस करते हुए कहा कि सिंगल बेंच के आदेश के बाद जो इंटरव्यू सूची बनायी गई है उसमें भी अपनों के अंक बढ़ाए गए हैं। जैसे एक अभ्यार्थी निताई मंडल को वेेटेज में आठ मिलना चाहिए था, लेकिन उस दस दिया गया है। जस्टिस भट्टाचार्या ने एजी से पूछा भी कि यह कैसे हुआ। आरोप है कि ऑरिजिनल दस्तावेज में दिए गए अंक में फेर बदल करने के बाद वेटेज बढ़ा कर इंटरव्यू सूची में नाम डाल दिए गए। इंटरव्यू लिस्ट से बाहर रह गए अभ्यार्थी 31 जुलाई तक एसएससी के पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इनकी शिकायत क्या थी और किस तरह इनका निराकरण किया गया इसका पूरा ब्योरा भी अगली सुनवायी के दिन पेश करना पड़ेगा। एडवोकेट जनरल किशोर दत्त ने बेंच को बताया कि इस तरह की साढ़े आठ हजार शिकायतें आई हैं। उन्होंने बताया कि कुल 14339 पदों पर नियुक्ति की जानी है और 15436 अभ्यार्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। कुल 9327 अभ्यार्थियों के आवेदन रद्द किए गए हैं। यहां गौरतलब है कि 2016 के बाद पश्चिम बंगाल में टेट का आयोजन नहीं किया गया है। इसी लिए जस्टिस गांगुली ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि अगले टेट में आयु सीमा में पांच साल की छूट दी जाए ताकि बाहर रह गए लोगों को एक और मौका मिल सके।

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