हाई कोर्ट के जज ने कहा : स्कूल सर्विस कमिशन पर भरोसा नहीं

कक्षा 9 व 10 के टीचर के पद पर नियुक्ति के मामले में हेराफेरी
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : हाई कोर्ट के जज ने कहा कि स्कूल सर्विस कमिशन पर कोई भरोसा नहीं है। एक मामले की सुनवायी के दौरान जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने एडवोकेट जनरल की तरफ मुखातिब होते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस गंगोपाध्याय कक्षा नौ और दस के लिए टीचरों की नियुक्ति के मामले में हेराफेरी करने का आरोप लगाते हुए दायर रिट पर सुनवायी कर रहे थे।
एडवोकेट फिरदौश शमीम ने बताया कि उत्तर दिनाजपुर के गोविंद मंडल ने यह रिट दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि मेरिट लिस्ट में निम्नोक्त स्थान पर रहने वाले की टीचर पर नियुक्ति की गई और उपर वाले की अनदेखी की गई। कक्षा नौवीं और दसवीं के टीचर पद पर नियुक्ति के लिए 2016 में अधिसूचना जारी की गई थी। इसके बाद 2017 में परीक्षा हुई और मेरिट लिस्ट बनाये जाने के बाद 2019 में टीचर के पदों पर नियुक्ति दे दी गई। उन नियुक्तियों में एक नीलमणि वर्मन भी शामिल है जो मेरिट लिस्ट में 214वें स्थान पर था और उसे 58.67 अंक मिले थे। जबकि पिटिशनर गोविंद मंडल मेरिट लिस्ट में 253वें स्थान पर था और उसे 60 अंक मिले थे। मंडल ने सूचना के अधिकार के तहत स्कूल सर्विस कमिशन से जानकारी मांगी तब जाकर हेराफेरी के इस खेल का उजागर हुआ। इसके बाद उसने हाई कोर्ट में रिट दायर कर दी। जस्टिस गंगोपाध्याय ने स्कूल सर्विस कमिशन से इस बाबत रिपोर्ट तलब की थी। स्कूल सर्विस कमिशन की तरफ से जो रिपोर्ट दाखिल की गई है उसमें यह माना गया है कि यह गलती हुई है। इस मामले में जब एडवोकेट जनरल किशोर दत्त सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे थे तभी जस्टिस गंगोपाध्याय ने यह तल्ख टिप्पणी की। जब उन्होंने इस मामले के दस्तावेजों को तलब करना चाहा तो एजी ने कहा कि मेरिट लिस्ट के प्रकाशन के एक साल बाद दस्तावेज नष्ट कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि ठीक है पर बात यही समाप्त नहीं होगी। इसके बाद जस्टिस गंगोपाध्याय ने इस मामले को निजी कारणों से रिलीज करते हुए चीफ जस्टिस के पास भेज दिया।

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