हाई कोर्ट ने नहीं दी गर्भपात कराने की इजाजत

गर्भस्थ शिशु को दिल की गंभीर बीमारी, पर बच्चा जनने को मजबूर
कानून की पहरेदारी के कारण हाई कोर्ट भी लाचार
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : एक मां अपने गर्भ में सात माह से भी अधिक समय से पल रहे शिशु को जनना नहीं चाहती है। वह गर्भपात कराना चाहती है। जाहिर है कि एक मां ने बेहद मजबूरी में ही यह फैसला लिया होगा, क्योंकि जिस शिशु को मां ने सात माह से भी अधिक समय तक अपने गर्भ में पाला है उसकी अकाल मौत का फैसला इतनी आसानी से वह नहीं ले सकती है। पर हाई कोर्ट के जस्टिस मो. निजामुद्दीन ने उसे गर्भपात कराने की इजाजत नहीं दी। कानून की पहरेदारी के कारण वे भी लाचार थे।
एडवोकेट अमृता पांडे ने यह जानकारी दी। जस्टिस निजामुद्दीन ने सवाल किया कि एक ऐसी नजीर दिखाएं जिसमें कोर्ट ने 31 माह के गर्भ का गर्भपात कराने की इजाजत दी हो। बचाव पक्ष के एडवोकेट सास्वत सरकार ऐसी कोई नजींर नहीं दे पाए। इसके बाद जस्टिस निजामुद्दीन ने पिटिशनर मां से कहा कि वह और चार सप्ताह तक इंतजार कर ले। पर यह इंतजार कितना पीड़ादायक होगा इसका एहसास मां के इस बयान से हो सकता है। वह कहती है कि उसे एक ऐसा बच्चा जनने के लिए मजबूर किया जाएगा जिसके जिंदा रहने की संभावना बेहद कम है। इस इंतजार के दौरान जिस मानसिक पीड़ा से गुजरनी पड़ेगी वह असहनीय होगी। यह एक ट्रामा से कम नहीं होगा। इस महिला की उम्र 31 साल के करीब है। गर्भ में पल रहे शिशु के दिल की गंभीर बीमारी की जानकारी उसे फोटल इकोकार्डियोग्राफी कराने के बाद मिली। गर्भस्थ शिशु हाइपो प्लास्टिक लेफ्ट सिनड्रॉम का शिकार है। इसमें दिल से मस्तिष्क तक रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती है। एडवोकेट सास्वत सरकार की दलील है कि हार्ट डिफेक्ट के कारण बच्चे के बहुत दिनों तक जीवित रहने की संभावना बेहद कम है। हाई कोर्ट ने 26 अक्टूबर को आदेश दिया था कि इस प्रकरण की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। कोर्ट के आदेश के बाद नौ विशेषज्ञों के बोर्ड ने मामले पर गौर करने के बाद गर्भपात कराये जाने के पक्ष में राय नहीं दी। इसका हवाला देते हुए जस्टिस निजामुद्दीन ने मां की याचिका खारिज कर दी। अलबत्ता सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए एडवोकेट ने कहा कि मां को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। मेडिकल नैतिकता के मद्देनजर जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के सारे उपाय किए जाएंगे। एडवोकेट सरकार ने बोर्ड की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कोई पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट शामिल नहीं था। लिहाजा इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। सरकार की तरफ से पैरवी करते हुए एडवोकेट तपन चटर्जी ने कहा कि महिला को एसएसकेएम में भर्ती कराने की व्यवस्था की गई है, चिकित्सा के बेहतर इतजाम किए जाएंगे, पर गारंटी नहीं दे सकते हैं। दूसरी तरफ मां का कहना है कि उसे एक अवांछित गर्भ के बोझ को वहन करना पड़ेगा जो उसे संविधान की धारा 21 के तहत मिले अधिकार के विपरीत है। पर जस्टिस निजामुद्दीन का फैसला है कि गर्भपात नहीं कराया जा सकता है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन, ऐसे करें आवेदन

" हमारा सपना हर छात्र माने हिंदी को अपना" हर साल की तरह इस साल भी हम लेकर आये हैं राम अवतार गुप्त प्रोत्साहन। इस बार आगे पढ़ें »

कोविड से ठीक हो चुके लोगों को ओमिक्रॉन से कितना खतरा? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ

भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के सबसे खतरनाक माने आगे पढ़ें »

विक्की कौशल ने बताया, कैसी पत्नी चाहते हैं वे? सुनकर कैटरीना के फैन्स हो जायेंगे खुश

…और गोवा में तृणमूल को मिल गया साथ

सर्दियों में सेक्स क्यों है ज्यादा मजेदार, जानें?

सिहरन पैदा करनेवाली ऑनर किलिंग : महाराष्ट्र के औरंगाबाद में गर्भवती बहन का सिर धड़ से किया अलग, फिर भाई पहुंचा थाने

गर्भ में ही 7 महीने का बच्चा खो चुकीं बिंदू, इस हादसे के बाद दोबारा कभी मां नहीं बन…

आईसीसी रैंकिंग में नंबर-1 बना भारत

नागालैंड की घटना पर एक्शन में सेना, जांच के लिए गठित की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी

विक्की-कटरीना आज जायेंगे राजस्थान, मुंबई में हो सकती है रजिस्टर्ड मैरिज

तृणमूल सांसद नहीं गये नागालैंड

ऊपर