महानगरः हर्ड इम्युनिटी हुई विकसित, इसलिए अचानक कोविड मामले आए नीचे

थर्ड वेव आया तो भी अधिक खतरनाक होने के संकेत नहीं
ट्रॉपिकल मेडिसिन के वैज्ञानिक का दावा
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः राज्य में दो जिलों में कोविड-19 वायरस का संक्रमण तेजी से हुआ था। अब शहर के उन्हीं हिस्सों में एक बड़े समुदाय के कोविड वायरस के इम्यून होने के संकेत मिल रहे हैं। इसे हर्ड इम्यूनिटी विकसित होने का नतीजा माना जा रहा है। स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन, कलकत्ता के वैज्ञानिक व डॉ. अरिंदम चक्रवर्ती ने कहा कि देखा जा रहा है कि राज्य में अचानक से कोविड के मामले बढ़ने लगे थे। हालांकि फिर धीरे-धीरे मामले कम होते चले गए। ऐसे में यह साफ संकेत है कि राज्य में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो गई है। यही वजह है कि मामलों में कमी दर्ज की गई।
थर्ड वेव के आने को लेकर उनका कहना है कि पहली बात तो यह कि वेव आएगी या नहीं इस पर भी संशय है। इसे लेकर केवल लोगों में चर्चा का ही माहौल है। ऐसे में यदि थर्ड वेव देश में आती भी है तो उसका प्रभाव सेकेंड वेव के मुकाबले काफी कम होगा। इसकी वजह है कि सेकेंड वेव ने काफी प्रभाव लोगों पर डाला है। इसके अलावा वैक्सीनेशन प्रक्रिया पर भी काफी जोर दिया जा रहा है।
कोविड से लड़ने की क्षमता हुई विकसित
डॉ. अरिंदम चक्रवर्ती ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमित बड़ी आबादी में एंटीबॉडी मिले हैं। इसका मतलब है कि शहर के लोगों में बड़े पैमाने पर वायरस से लड़ने की क्षमता विकसित हो गई है। यही वजह है कि अब कोविड का ग्राफ धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। 14 मई को एक दिन में राज्य में कोविड के 20,846 मामले दर्ज किए थे। अब एक दिन में कोविड का आंकड़ा शनिवार को 7,682 दर्ज हुआ है। ऐसे में कोविड का ग्राफ सीधे तीन गुना के करीब नीचे आ गया है। यह राहत के संकेत हैं।
क्या है हर्ड इम्युनिटी
हर्ड इम्युनिटी, संक्रामक बीमारियों के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से बचाव होता है। दरअसल यह तब होता है जब आबादी या लोगों का समूह या तो वैक्सीन लगने पर या फिर संक्रमण से उबरने के बाद उसके खिलाफ इम्युनिटी विकसित कर लेती है। सामूहिक इम्युनिटी को ही हर्ड इम्युनिटी कहते हैं। जब आबादी में हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है, तो यदि उनमें से कुछ लोग वैक्सीन नहीं लगवा पाते या फिर जिनमें प्रतिरक्षा विकसित नहीं होती है वो भी इस संक्रमण से बचे रहते हैं क्योंकि उनके आसपास जिन लोगों में प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी होती है वो उनके और संक्रमित लोगों के बीच प्रतिरोध का काम करते हैं। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी स्थापित हो जाती है तो इस बीमारी के फैलने की क्षमता में बाधा आ जाती है और बीमारी का प्रसार रुक जाता है।

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