डीए मामले की सुनवायी पूरी, हाई कोर्ट का फैसला आरक्षित

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : राज्य सरकार के कर्मचारियों को डीए देने के मामले में राज्य सरकार की तरफ से दायर अपील पर हाई कोर्ट में सुनवायी शुक्रवार को पूरी हो गई। जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस रवींद्रनाथ सामंत के डिविजन बेंच ने फैसले को आरक्षित कर लिया। केंद्र के समान दर पर डीए देने के ट्राईब्यूनल के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से अपील दायर की गई थी।
राज्य सरकार के कर्मचारियों को डीए देने का मामला कई वर्षों से ट्राईब्यूनल और हाई कोर्ट के बीच भटक रहा था, शुक्रवार को कम से कम हाई कोर्ट के लेवल पर तो यह मामला निपट गया। क्या राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की दरों पर डीए का भुगतान किया जाएगा। जस्टिस टंडन के डिविजन बेंच को इसी बाबत अपना फैसला सुनाना है। इसमें राज्य सरकार की दलील रही है कि डीए की दरों के बाबत उसे अपने नियमों के तहत फैसला लेना है। पिटिशनरों का दावा है कि राज्य सरकार ने पेकमीशन के सुझाव को स्वीकार कर लिया था जिसमें साल में दो बार डीए की दरें तय करने की बात कही गई थी। इसके बाद ही रोपा रूल्स 2009 को मंजूरी दी गई थी। उनकी दलील थी कि सरकार रिपोर्ट को आंशिक रूप से स्वीकार नहीं कर सकती है।बहरहाल अब इस मामले पर फैसला डिविजन बेंच को सुनाना है। यहां गौरतलब है कि इससे पहले ट्राईब्यूनल ने अपने फैसले में कहा था कि डीए एक सरकारी अनुकंपा है और यह कर्मचारियों का अधिकार नहीं है। तत्कालीन जस्टिस देवाशिष करगुप्ता के डिविजन बेंच ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि डीए कर्मचारियों का अधिकार है, लेकिन दरें तय करने के मामले में इसे फिर ट्राईब्यूनल को भेज दिया गया था। ट्राईब्यूनल ने कहा कि राज्य सरकार को भी केंद्र की दरों के समान डीए देना पड़ेगा तो राज्य सरकार ने इसके खिलाफ डिविजन बेंच में अपील दाखिल कर दी। अब इसी का फैसला आना है।

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