नारदा मामले में आज फिर सुनवायी

सीबीआई ने मांगा समय
न्यायिक हिरासत में ही बने रहेंगे सुब्रत, फिरहाद, मदन और शोभन
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : नारदा मामले में आज गुरुवार की दोपहर 2 बजे से फिर सुनवायी होगी। बुधवार को लॉकडाउन के बीच राज्य में 2 मंत्रियों, विधायक व पूर्व मेयर को जेल में रहना होगा या फिर बेल मिलेगी, इसका मुद्दा दिन भर छाया रहा। इस दौरान हाई कोर्ट को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया था। सीबीआई के वकील ने सुबह 11 बजे हाई कोर्ट का रूख किया जहां दोपहर 2 बजे के बाद सुनवायी शुरू हुई। नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में की गई गिरफ्तारी को लेकर हाई कोर्ट में दायर रिकॉल पिटिशन पर सुनवायी बुधवार को अधूरी रह गई। हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस अरिजीत बनर्जी के डिविजन बेंच में इसकी सुनवायी हो रही है। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने रिकॉल पिटिशन का जवाब देने के लिए दो दिनों का समय मांगा तो बचाव पक्ष ने इसका तीखा विरोध किया। बहरहाल दोनों पक्षों को सुनने के बाद डिविजन बेंच ने सालिसिटर जनरल को गुरुवार के दो बजे तक का समय दिया और उसी दिन दोबारा मामले की सुनवायी करने का फैसला किया।
मामला एक नजर में
यहां गौरतलब है कि नारदा स्टिंग ऑपरेशन के मामले में सीबीआई ने मंत्री सुब्रत मुखर्जी, मंत्री फिरहाद हकीम, पूर्व मंत्री मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी को गिरफ्तार किया है। सिटी सेशन कोर्ट के स्पेशल जज ने 17 मई को उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था, लेकिन इस आदेश के खिलाफ सीबीआई की तरफ से हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी गई। एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस अरिजीत बनर्जी के डिविजन बेंच ने स्पेशल जज के आदेश पर उसी दिन स्टे लगा दिया था। इसके खिलाफ ही अभियुक्तों की तरफ से एक्टिंग चीफ जस्टिस के डिविजन बेंच में रिकॉल पिटिशन दायर किया गया है। इस मामले में सीबीआई की तरफ से बहस कर रहे सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने डिविजन बेंच से अपील की कि पिटिशनरों की तरफ से दायर रिकॉल पिटिशन पर जवाब देने के लिए उन्हें दो दिनों का समय दिया जाए।‌ पिटिशनरों की तरफ से बहस कर रहे एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और एडवोकेट सिद्धार्थ लुथरा ने इसका तीखा विरोध किया। उनका कहना था कि यह एक अजीब सी दलील है कि उन्हें जवाब देने के लिए ही चार अभियुक्तों को जेल में रखा जाए। इसके जवाब में सालिसिटर जनरल ने दखल देते हुए कहा कि वे जेल में नहीं अस्पताल में हैं। इस पर एडवोकेट सिंघवी और एडवोकेट लुथरा ने कहा कि एक अभी भी जेल में है। उनकी दलील थी कि यह अभियुक्तों के जीवन और आजादी के बुनियादी अधिकार का सवाल है।
सवालों और जवाबों की ऐसी झड़ी जो अब तक किसी ने न सुनी
एडवोकेट सिंघवी और एडवोकेट लुथरा ने डिविजन बेंच से कहा कि सीबीआई की मंशा है कि उन्हें एक-दो-तीन‌ दिन जेल में रखा जाए। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि अभियुक्तों को जेल में क्यों रखा जाएगा। क्या उन्होंने नारदा स्टिंग ऑपरेशन के मामले के किसी दस्तावेज को नष्ट किया है। इसके साथ ही सवाल किया कि क्या उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया है। एडवोकोट सिंघवी और एडवोकेट लुथरा की दलील थी कि सीबीआई की वजह से किसी के बुनियादी अधिकार का हनन नहीं किया जा सकता है। इसलिए उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया जाए। दूसरी तरफ सालिसिटर जनरल रिकॉल पिटिशन का जवाब देने के लिए समय दिए जाने की अपील लगातार कर रहे थे। बहरहाल डिविजन बेंच ने दोनों पक्षो को सुनने के बाद वृहस्पतिवार को दो बजे तक का समय दिया। इसी दिन मामले की फिर सुनवायी होगी। यहां गौरतलब है कि वृहस्पतिवार को होने वाली सुनवायी में एडवोकेट जनरल किशोर दत्त भी हिस्सा लेंगे। अभी तक यह सीबीआई के खिलाफ अभियुक्तों का निजी मामला था, लेकिन राज्य की कानून व्यवस्था का सवाल उठाए जाने के कारण उन्हें राज्य सरकार की तरफ से इस पहलू पर अपनी दलील देनी पड़ेगी।

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