अचानक डिमांड बढ़ने के कारण परेशान हुआ स्वास्थ्य विभाग

वैक्सीन ही नहीं, नर्स व डॉक्टर भी हैं कम
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : कोरोना की वैक्सीन तो आ गयी मगर दहशत और अव्यवस्था खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कुछ दिनों पहले तक जहां लाेग कोरोना की वैक्सीन लगवाने में झिझक रहे थे, वहीं अब वैक्सीन के लिए अस्पतालों के सामने लम्बी-लम्बी कतारें लग रही हैं। अचानक डिमांड बढ़ने के कारण स्वास्थ्य विभाग भी परेशान है। मंगलवार को राज्य के कई अस्पतालों के सामने वैक्सीन के लिए लम्बी कतारें देखी गयीं। लाेग वैक्सीन के लिए सुबह से ही कतारों में खड़े दिखे। 8-8 घण्टे के इंतजार के बाद लोगों को वैक्सीन मिला।
मामले बढ़ने के साथ ही बढ़ी मांग
वैक्सीन जब निकली तो उस समय कोरोना के मामले कम थे और वैक्सीन लगाने को लेकर लोगों में झिझक भी थी। हालांकि कोरोना के मामले बढ़ने के साथ ही वैक्सीन की मांग भी तेजी से बढ़ी। पहले जहां एक दिन में 27-28 हजार वैक्सीन दिये जाते थे, वहीं अब एक दिन में 40 हजार तक वैक्सीन दिये जा रहे हैं। इसके अलावा नर्सों और डॉक्टराें की कमी से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इन सभी कारणों से कोविड वैक्सीन के लिए अव्यवस्था की स्थिति देखी जा रही है।
क्या कहा स्वास्थ्य अधिकारी ने
स्वास्थ्य विभाग के सचिव एन. एस. निगम ने सन्मार्ग से कहा, ‘मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन सप्लाई मांग के अनुरूप नहीं है। टोकन जारी कर वैक्सीन के लिए अगर कम लोगों को बुलाया जा सके तो फिर इसमें कुछ सुधार हो सकता है। इसके बावजूद मांग के अनुसार वैक्सीन देने की पूरी कोशिश की जा रही है और एक दिन में जितने लोग आ रहे हैं, उन सबको वैक्सीन दी जा रही है।’
क्या कहते हैं सर्विस फोरम के डॉक्टर
सर्विस डॉक्टर्स फोरम के डॉ. सजल विश्वास ने बताया, ‘वैक्सीन की कमी के साथ – साथ डॉक्टरों व नर्सों की कमी से इनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि प्रतिदिन अधिकतम 200 लोगों को वैक्सीन की डोज दी जा सकती है, लेकिन हड़बड़ी में लाेग अत्यधिक भीड़ कर रहे हैं जिस कारण अव्यवस्था जैसी स्थिति हो रही है।’
कुछ इस तरह है डिमांड के अनुसार सप्लाई में कमी
केंद्र भले ही वैक्सीन की कमी को लेकर लगाये जा रहे आरोपों से इनकार कर रहा है और राज्य पर दोष दे रहा है, लेकिन इस बात को ध्यान में रखना होगा कि केंद्र अकेले ही वैक्सीन का खरीदार और सप्लायर दोनों है। 45 से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन देने की घोषणा के बाद केंद्र बढ़ती मांग को भांपने में असमर्थ रहा। कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के निर्माताओं की कुल उत्पादन क्षमता प्रतिदिन लगभग 24 लाख वैक्सीन है जबकि मौजूदा मांग प्रति दिन 37 लाख वैक्सीन की है। कहा जा रहा है कि डिमांड और सप्लाई का ये अंतर आने वाले दिनों में और बढ़ेगा क्योंकि अब मार्केट में भी वैक्सीन उपलब्ध हो जाएगी। मार्च महीने में कोरोना के मामले कम होने के कारण स्थिति ऐसी नहीं थी। हालांकि गत 1 अप्रैल से कोरोना की दूसरी लहर में मामले बढ़ने के साथ ही वैक्सीन के लिए होड़ लग गयी। मौजूदा स्थितियों में वैक्सीन की उत्पादन क्षमता में वृद्धि की काफी आवश्यकता है अन्यथा आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है।

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