तारकेश्वर मंदिर परिसर के दुकानदारों के सिर पर हाथ

दो साल से नहीं हो रहा है जलाभिषेक, चेहरे पर चिंता की लकीरें
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाताः कोरोना वायरस महामारी के बीच तारकेश्वर मंदिर में दो साल से जलाभिषेक नहीं हो पा रहा है। हालांकि सावन के मेले के दौरान बड़े पैमाने पर दुकानदारों को व्यवसाय की आस रहती थी। अब ऐसा नहीं होने से उनके सिर पर हाथ है, साथ ही चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं। इस सावन मेले के अवसर पर एक माह में ही दुकानदार अच्छा कारोबार करते थे। लेकिन इस बार कारोबार लगभग बंद सा है। नतीजन व्यापारियों को घाटा हो रहा है। सावन मेले के दौरान वैद्यबाटी में निमाई तीर्थ घाट समेत कई अन्य घाटों से श्रद्धालु पानी लेते हैं। उसके बाद उन्हें करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर भगवान शिव के शिवलिंग पर जलाभिषेक करना होता है। हालांकि इस बार घाटों पर भक्तों का जमावड़ा नहीं लग रहा है। इस मेले पर हजारों व्यापारियों का कारोबार निर्भर है। नाविक, घड़े, बर्तन, बनियान और कपड़े सहित लगभग 25 तरह की चीजें भक्त खरीदते हैं। शेवड़ाफुली से वैद्यबाटी तक सड़क के किनारे बहुत सारी स्थायी दुकानें हैं। यह उनकी साल भर की आय का समय है। लेकिन इस बार सब कुछ बंद है। सावन मेला बंद होने के कारण उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। उनमें से कई खुद दुकानों में बर्तन बनाते हैं। वे भी संकट में हैं। इस संदर्भ में वैद्यबाटी नगर पालिका के प्रशासन के अरिंदम गुई ने कहा, ”पिछले साल भी मेला बंद रहने से व्यापारी प्रभावित हुए थे।” वास्तव में, व्यापारी साल भर सावन मेले में जो कुछ भी खरीदते हैं, उसे लेकर जाते हैं। लेकिन लोगों को कोरोना महामारी को भी समझना चाहिए। सभी को कोई न कोई परेशानी हो रही है। इस पर समझने की जरूरत है।”

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