सड़कों पर उतरीं सरकारी बसें, मगर निजी बसों की संख्या ना के बराबर

  • दूर जाने वाले यात्रियों को हो रही परेशानी
  • ऑटो व टैक्सियां भी चलने लगीं सड़कों पर

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता: कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच पाबंदियों में कुछ राहत देते हुए 1 जुलाई से राज्य सरकार ने बसों के उतारने की घोषणा की थी। ऐसे में लगभग डेढ़ महीने के बाद इस दिन सरकारी बसें तो सड़कों पर उतरीं मगर निजी बसों की संख्या ना के बराबर दिखायी दीं। यहां उल्लेखनीय है कि निजी बस संगठन पहले ही कह चुके हैं कि किराया बढ़ाये बगैर वे सड़कों पर बसें नहीं उतारेंगे। हालांकि कोई बस मालिक अगर चाहे तो बसे उतार सकता है, लेकिन किसी संगठन की ओर से बसों को उतारने की कोई अपील नहीं की गयी है। बसों के अलावा ऑटो और टैक्सियां भी इस दिन से सड़कों पर चलने लगीं। बसें कम संख्या में चलने के कारण जो बसें आ रही थीं, उनमें यात्रियों की काफी अ​धिक भीड़ देखी गयी। 50% सीटिंग क्षमता को भूलते हुए यात्रियों को किसी तरह गेट पर झूलते हुए और खचाखच भीड़ वाली बसों में यात्रा करते हुए देखा गया।
4,000 सरकारी बसें उतरीं सड़कों पर
राज्य के परिवहन मंत्री फिरहाद हकीम ने कहा कि गुरुवार को करीब 4,000 बसों को शहर की सड़कों पर उतारा गया है, जरूरत पड़ी तो इनकी संख्या बढ़ायी जायेगी। उन्होंने कहा कहा कि निजी बस मालिकों से अपनी सेवाएं शुरू करने का पहले ही अनुरोध किया गया था।
सरकारी छुट्टी के कारण थी कुछ राहत
गुरुवार को नेशनल डॉक्टर्स डे के कारण सरकारी छुट्टी थी और ऐसे में स्वाभाविक तौर पर लोगों की संख्या कुछ कम होने के कारण राहत थी। सामान्य दिनों में बसें इतनी कम संख्या में रहेंगी तो आगे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
बसों के लिए यात्रियों ने किया घण्टों इंतजार
धर्मतल्ला बस स्टैंड हो या फिर चांदनी चौक, डलहौसी, श्यामबाजार, पार्क स्ट्रीट जैसे इलाके हो, सभी जगहों पर बसों के लिए यात्रियों को घण्टों इंतजार करते हुए देखा गया। धर्मतल्ला के सरकारी बस स्टैण्ड पर भी दूरगामी सरकारी बसों की संख्या कम देखी गयी। बैरकपुर जाने के लिए लगभग डेढ़ घण्टे से बस का इंतजार कर रहे यात्री मनोज कांति घोषाल ने कहा, ‘मुझे पलता जाना है, बैरकपुर के लिए बस चाहिये, लेकिन पौने दो घण्टे हो गये, लेकिन बस नहीं मिल रही। मैं रूबी से 150 रुपये देकर शटल में धर्मतल्ला तक आया।’ बैरकपुर जाने वाली निशा साव चांदनी में काम करती हैं। उसने कहा कि वह एक घण्टे से बस का इंतजार कर रही है, लेकिन बस नहीं मिल रही। राजाबाजार में काम करने वाले सुब्रत धर शटल से धर्मतल्ला तक आये, लेकिन मनिरामपुर जाने के लिए उन्हें बस नहीं मिल रही। उन्होंने कहा, ‘पौने 3 घण्टे से कतार में खड़ा हूं, बस नहीं मिल रही। इस कारण काफी समस्या हो रही है।’
सरकारी बसें सड़कों पर, निजी बसें दिखी फुटपाथ के​ किनारे
परिवहन में छूट दिये जाने के बाद विभिन्न रास्तों पर सरकारी बसें नजर आयीं, लेकिन निजी बसें फुटपाथों के किनारे खड़ी दिखीं। बांगुर, लेकटाउन से लेकर कई सड़कों पर विभिन्न रूटाें की बसें खड़ी दिखायी दीं। गिनती की कुछ निजी बसें ही इस दिन सड़कों पर दिखीं। इसके अलावा इक्का – दुक्का मिनी बसें दिखायी दीं। सरकारी बसों की संख्या भी जरूरत के हिसाब से कम रही। हजारों की संख्या में निजी बसें अलग-अलग टर्मिनल के भीतर ही खड़ी देखी गयीं। निजी बस मालिकों का कहना है कि ईंधन और कलपुर्जों के मूल्यों में बढ़ोतरी हुई है और बस भाड़े की वर्तमान दर पर उनके लिए अपनी सेवाएं शुरू करना युक्तिसंगत नहीं है।

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