देर हो रही है, पापा कब आओगे…प्रिंस की आंखें अभी भी खोज रही हैं पिता को

रेल भवन में लगी आग में झुलसने से हुई गिरीश दे की मौत
कोलकाता : परिवार की एकमात्र संतान गिरीश दे थे। पिछले 1 साल से वह पाटुली के एन ब्लॉक में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। मंगलवार को गिरीश अपनी पत्नी और बेटे के साथ पुरुलिया घूमने के लिए जाने वाला था। हालांकि स्ट्रैंड रोड स्थित इमारत में लगी आग को बुझाने गये गिरीश फिर वापस घर नहीं लौट पाया। गिरीश लालबाजार फायर स्टेशन में सब ऑफिसर के पद पर तैनात था। मंगलवार की दोपहर ट्रेन से गिरीश पत्नी और बेटे के साथ पुरुलिया जाने वाला था। सोमवार की दोपहर पत्नी से आखिरी बार गिरीश की बात हुई थी। वहीं 8 साल के प्रिंस को अभी तक नहीं पता है कि उसके पिता अब जीवित नहीं हैं। मंगलवार को वह बार-बार मां को बोल रहा था पिता दोपहर में आएंगे हमें बैग भर लेना है। वहीं दूसरी ओर दे परिवार के जीवन में अंधेरा छा गया है। गिरीश पिछले 13 साल से दमकल विभाग में कार्यरत है। उसने जापान में जाकर प्रशिक्षण लिया था। नागपुर, मध्य प्रदेश, बंगलुरु से भी उसने प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इस साल वह दमकल विभाग के ओसी पद के लिए परीक्षा देने वाला था। गिरीश अपनी मां-बाप की एकमात्र संतान थे। शहर के नंदराम, बागड़ी मार्केट, सहित विभिन्न आग लगी की घटना के दौरान उन्होंने आग बुझाने का काम किया था।

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